नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव चीन के बीजिंग पहुंचे हैं, जहां वे चीन के विदेश मंत्री वांग यी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। यह बातचीत मुख्य रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न अस्थिरता, अमेरिका द्वारा घोषित नाकेबंदी और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर केंद्रित बताई जा रही है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।
चीन और रूस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में और अधिक रणनीतिक होते गए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन दोनों देशों के संबंधों को “सीमाहीन साझेदारी” के रूप में वर्णित करते हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा मामलों में एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं, विशेषकर पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने के प्रयासों के तहत।
इस बीच, चीन की ऊर्जा आवश्यकताओं के कारण यह संकट और अधिक संवेदनशील हो गया है। चीन लंबे समय से ईरान से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता रहा है, जबकि रूस भी उसका एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देश है। ऐसे में यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर औद्योगिक उत्पादन, परिवहन व्यवस्था और आर्थिक वृद्धि पर पड़ने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज क्षेत्र में बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय बन चुका है, जिस पर सभी देशों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। चीन–रूस वार्ता इस दिशा में क्या कूटनीतिक संकेत देती है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।










