अटलांटा: इंग्लैंड ने जैसे-तैसे जीत हासिल कर फीफा वर्ल्ड कप २०२६ के अंतिम-१६ दौर में प्रवेश कर लिया। बुधवार रात खेले गए मैच में अंतिम समय तक पिछड़ने के बाद, इंग्लैंड ने असाधारण वापसी करते हुए जुझारू डीआर कांगो को २-१ से पराजित किया। इंग्लैंड को जीत दिलाने में कप्तान हैरी केन का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने मैच में टीम के लिए दोनों गोल किए। इंग्लैंड अब अंतिम-१६ में सह-मेजबान मेक्सिको का सामना करेगा।
सिएटल स्टेडियम में ४६ प्रतिशत पजेशन के साथ खेलने वाले अफ्रीकी देश डीआर कांगो की शुरुआत शानदार रही और ब्रायन सिपेंगा ने ७वें मिनट में ही टीम को बढ़त दिला दी। यह उनका अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में पहला गोल भी है। चांसल मबेम्बा के हेडर के बाद बॉक्स के बाईं ओर मौजूद सिपेंगा ने जमीनी शॉट लगाकर इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड को छकाते हुए डीआर कांगो को १-० की बढ़त दिलाई।
गोल खाने के बाद इंग्लैंड ने लगातार आक्रमण किए, लेकिन मध्यांतर तक टीम को सफलता नहीं मिली। जूड बेलिंघम के २ शानदार हेडर को डीआर कांगो के गोलकीपर लियोनेल म्पासी ने फुर्ती के साथ सेव किया। इसी तरह, मार्कस रैशफोर्ड के प्रयास को आरोन वान-बिसाका ने गोललाइन से क्लियर कर दिया। पहले हाफ के अंतिम क्षणों में हैरी केन की वॉली को म्पासी ने रोका। वहीं डीआर कांगो के योआने विस्सा का शॉट भी पोस्ट से टकराकर वापस आ गया।
दूसरे हाफ के खेल में इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस ट्यूशेल द्वारा किए गए बदलावों का असर खेल पर साफ दिखाई दिया। सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी एंथनी गॉर्डन के क्रॉस पर हैरी केन ने हेडर के जरिए गोल करके ७५वें मिनट में इंग्लैंड को १-१ की बराबरी पर ला खड़ा किया। इसके बाद इंग्लैंड ने मैच को अपने नियंत्रण में लेकर लगातार दबाव बनाए रखा। मैच के ८६वें मिनट में केन ने एक बार फिर अपना क्लास दिखाया। उन्होंने शानदार टर्न लेकर डिफेंडर को छकाया और गेंद को विपक्षी नेट में डालकर इंग्लैंड को मैच की निर्णायक बढ़त दिला दी।
अंतिम मिनटों में डीआर कांगो ने मैच में वापसी की कोशिश की, लेकिन इंग्लैंड के डिफेंस ने कोई मौका नहीं दिया और टीम ने रोमांचक जीत हासिल की। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप में अफ्रीकी टीमों के खिलाफ अपना अजेय रिकॉर्ड भी कायम रखा। इसके साथ ही इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार मध्यांतर तक एक गोल से पिछड़ने के बाद कोई मैच जीता है। इससे पहले ९ मैचों में ऐसी स्थिति होने पर इंग्लैंड ७ बार हारा था, जबकि २ मैच ड्रॉ रहे थे। दूसरी ओर, डीआर कांगो ने अपने पहले वर्ल्ड कप में असाधारण जुझारूपन दिखाया, लेकिन शुरुआती बढ़त का फायदा न उठा पाने के कारण उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।










