सेंट जेवियर्स महाविद्यालय के पूर्व छात्र संगठन की पहल पर “आशा का स्पर्श” कार्यक्रम आयोजित

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कोलकाता: सेंट जेवियर्स महाविद्यालय के पूर्व छात्र संगठन ने अपने प्रमुख समाजसेवी अभियान “आशा का स्पर्श—छोटे-छोटे प्रयास, असीम प्रभाव” के माध्यम से समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता एक बार फिर दृढ़ता से व्यक्त की। इस मासिक सामाजिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत गुरुवार को दक्षिण २४ परगना के नेपालगंज स्थित आशाबाड़ी में एक भ्रमण एवं सहायता वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
संस्था के अध्यक्ष रेवरेन्ड डॉक्टर डोमिनिक सैवियो की प्रेरणा से संचालित इस पहल का उद्देश्य समाज के सबसे असहाय और उपेक्षित लोगों तक सहानुभूति, सम्मान और देखभाल पहुंचाना है।
“आशा का स्पर्श” कार्यक्रम पूर्व छात्र संगठन का एक निरंतर समाजसेवी मंच है, जिसके माध्यम से पूर्व छात्र अनाथालयों और वृद्धाश्रमों का भ्रमण, वंचित बच्चों की सहायता तथा महिलाओं के कौशल विकास जैसे विभिन्न मानवीय कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में इस पहल ने अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।
सन् १९९९ में स्थापित आशाबाड़ी दक्षिण २४ परगना का एक महत्वपूर्ण आश्रय केंद्र है, जहां बीमार, बेघर और रास्तों से बचाए गए असहाय लोगों को आश्रय, उपचार और पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाती है। वर्तमान में यहां लगभग १०० निवासी रह रहे हैं। इसके साथ ही प्रत्येक सप्ताह एक निःशुल्क बाह्य रोगी चिकित्सा सेवा भी संचालित की जाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व छात्रों और लाभार्थियों को संबोधित करते हुए रेवरेन्ड डॉक्टर डोमिनिक सैवियो ने कहा, “यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारे मूल्यों का प्रतिबिंब और समाज के उपेक्षित लोगों के साथ खड़े होने की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। प्रत्येक छोटा मानवीय प्रयास भी बड़ा परिवर्तन ला सकता है।”
पूर्व छात्र संगठन के मानद सचिव श्री संजीव कोनेर के नेतृत्व में सदस्यों ने आशाबाड़ी के निवासियों के बीच खाद्य सामग्री, वस्त्र, स्वच्छता से संबंधित सामग्री और शय्या सामग्री का वितरण किया। यह सामग्री पूर्व छात्र सदस्यों और शुभचिंतकों के आर्थिक एवं वस्तुगत सहयोग से एकत्रित की गई थी।
इस पहल का मुख्य संदेश है- छोटा योगदान भी लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है और सम्मान व आशा की नई किरण जगा सकता है। “आशा का स्पर्श” कार्यक्रम के माध्यम से पूर्व छात्र संगठन ने एक बार फिर सिद्ध किया कि सामूहिक सहानुभूति समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने में सक्षम है और कोई भी पीछे न छूटे।

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