​​सीजफायर के बाद पहली बार पीएम मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर हुई बात

PM in a bilateral meeting with the President of the Islamic Republic of Iran, Dr. Masoud Pezeshkian, on the sidelines of the 16th BRICS Summit in Kazan, Russia on October 22, 2024.

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर दिया जोर

नयी दिल्ली: ​ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक संघर्षविराम (सीजफायर) के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की है। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति और वहां की आगे की रणनीति से अवगत कराया। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में हुए इस संघर्षविराम का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि सभी विवादों और मुद्दों का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
​पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत के दौरान विशेष रूप से समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिना किसी रुकावट के बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (ग्लोबल सप्लाई चेन) और आर्थिक स्थिरता के लिए समुद्री परिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बताया कि अमेरिका के साथ हाल ही में हुआ शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के साथ पूरी तरह तालमेल और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के समर्थन से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत के सभी चरण ईरानी सरकार की बड़ी नीतियों के दायरे में और देश के कानूनी नियमों के अनुसार आगे बढ़ाए गए हैं।
​पेजेश्कियन ने इस समझौते को ईरानी लोगों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ अंतिम समझौते तक पहुंचने की बातचीत में ईरान अपने लोगों के अधिकारों, अपने मूल सिद्धांतों और राष्ट्रीय हितों से किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेगा। ज्ञात हो कि १८ जून को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में चल रहे युद्ध को सभी मोर्चों पर खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें लेबनान भी शामिल है। दोनों देश अब एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए आगे की बातचीत कर रहे हैं, जिसमें खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने जैसे मुख्य मुद्दे शामिल हैं।

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