उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच सहयोग और सतत पर्यटन पर जोर
गंगटोक/तवांग: सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह गोले (तामांग) ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित प्रतिष्ठित ‘१४वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट २०२६’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के मार्गदर्शन में अरुणाचल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री गोले ने उत्तर-पूर्वी भारत को दुनिया के सबसे उत्कृष्ट पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सभी राज्यों के बीच आपसी सहयोग (हाथ मिलाने) पर बल दिया।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री गोले ने पवित्र भूमि तवांग और सिक्किम के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के बीच की हिमालयी विरासत, मठ (गुम्बा), जैव विविधता और गर्मजोशी से भरे आतिथ्य की परंपरा पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को दर्शाती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए मुख्यमंत्री गोले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को इस शानदार निमंत्रण और आतिथ्य के लिए हार्दिक धन्यवाद व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री गोले ने उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों (‘अष्टलक्ष्मी’) में पर्यटन की अपार संभावनाओं पर चर्चा करते हुए सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे और सड़क नेटवर्क को मजबूत करने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और युवाओं के लिए स्व-रोजगार के अवसर पैदा करने पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम में पर्यटन विकास के लिए हो रही प्रगति के बारे में जानकारी दी। विशेष रूप से राज्य में संचालित ‘मेगा होमस्टे योजना’, नए और कम चर्चित (ओझल में पड़े) पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार तथा विश्व स्तरीय पर्यटन बुनियादी ढांचे के निर्माण के क्षेत्र में सिक्किम द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, सिक्किम की आर्थिक समृद्धि और सुगम यातायात के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली ‘राष्ट्रीय राजमार्ग १०’ को बारह महीने चालू रहने वाले (ऑल-वेदर) राजमार्ग के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता को उन्होंने पुनः दोहराया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर-पूर्वी भारत द्वारा विकास, कनेक्टिविटी और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की बात कहते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि ‘अष्टलक्ष्मी’ की अवधारणा ने पूरे क्षेत्र को एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच आपसी सहयोग, केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही इस क्षेत्र को प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आतिथ्य के संगम के रूप में दुनिया भर में पहचाना जा सकता है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तथा अरुणाचल सरकार को धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री गोले ने १४वें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मार्ट की पूर्ण सफलता की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।





