कला और संस्कृति क्षेत्र स्तब्ध
गंगटोक: सिक्किम की वास्तुकला, कला, फोटोग्राफी और अमूल्य सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख स्तंभ दिवंगत श्री किरण रसाइली के निवास स्थान पहुंचकर मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने उनकी पार्थिव देह पर अंतिम श्रद्धा-सुमन अर्पित किया।
सिक्किम की कलात्मक पहचान और सांस्कृतिक ताने-बाने को संजोने में उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उनकी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। स्वर्गीय रसाइली की रचनात्मकता, उनकी दूरदर्शी सोच और कला के प्रति अटूट समर्पण ने न केवल सिक्किम बल्कि पूरे कला जगत को गहराई से प्रभावित किया था और उनके जाने से संस्कृति के क्षेत्र में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
अपने संपूर्ण जीवनकाल के दौरान उन्होंने सिक्किम की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के साथ-साथ राज्य की युवा प्रतिभाओं को तराशने और उन्हें एक सही मंच प्रदान करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई। उनकी बेहतरीन फोटोग्राफी, वास्तुकला की गहरी समझ और कलात्मक दृष्टिकोण ने अनगिनत उभरते हुए कलाकारों को प्रेरित किया और सिक्किम के कला परिदृश्य को अभूतपूर्व रूप से समृद्ध बनाया। कला और समाज के प्रति उनका यह निस्वार्थ समर्पण ही था जिसने उन्हें जन-जन का प्रिय और सम्मानित मार्गदर्शक बनाया।

स्वर्गीय किरण रसाइली भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा रचित अद्वितीय कार्य, उनकी कलाकृतियां और असंख्य लोगों के जीवन पर छोड़ी गई उनकी अमिट छाप हमेशा जीवित रहेगी। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करती रहेगी। इस अत्यंत दुखद और कठिन समय में शोक संतप्त परिवार, परिजनों और उनके मित्रों के प्रति अपनी गहरी और हार्दिक संवेदना व्यक्त की गई है और ईश्वर से इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की गई है।










