काठमांडू: नेपाल सरकार ने वर्ष २००५/०६ के बाद से सार्वजनिक पदों पर रहे प्रमुख राजनेताओं और उच्च पदस्थ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक शक्तिशाली आयोग का गठन किया है। बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के निर्णय के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र कुमार भण्डारी को इस आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
सरकार की प्रवक्ता सस्मिता पोखरेल ने जानकारी दी कि आयोग के अन्य सदस्यों में पूर्व न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, चंडीराज ढकाल, पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश लम्साल शामिल हैं।
आयोग की मुख्य जिम्मेदारी
२००५/०६ से अब तक के राजनीतिक पदाधिकारियों और उच्चाधिकारियों की संपत्ति का विवरण एकत्र करना।
विवरणों का सत्यापन और गहन जांच करना।
अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे कानूनी दायरे में लाने की सिफारिश करना।
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इसे प्रमुख मुद्दा बनाया था। हालांकि पार्टी ने १९९० के बाद की संपत्ति जांच का वादा किया था, लेकिन फिलहाल आयोग को २००५/०६ के बाद की जिम्मेदारी दी गई है। प्रवक्ता पोखरेल के अनुसार, १९९० के बाद के मामलों पर भी जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।
जेन-जी आंदोलन रिपोर्ट कार्यान्वयन तंत्र
इसी बीच, सरकार ने ‘जेन-जी’ आंदोलन जांच आयोग द्वारा सुरक्षा निकायों के संबंध में दी गई सिफारिशों को लागू करने के लिए एक अलग तंत्र का भी गठन किया है। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रेमराज कार्की के संयोजन में बने इस तंत्र में सशस्त्र पुलिस बल के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक सुबोध अधिकारी और नेपाल पुलिस के पूर्व अतिरिक्त महानिरीक्षक टेक प्रसाद राय सदस्य हैं।








