सऊदी ने हूतियों के खिलाफ ३० साल में पहली बार दागी चीनी डीएफ-१५ए मिसाइल

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​नई दिल्ली: सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों पर डीएफ-१५ए मिसाइल दागी है। लगभग तीन दशकों में यह पहला मौका है जब सऊदी सेना ने चीन से खरीदी गई इस मिसाइल का इस्तेमाल किसी युद्ध में किया है।
​रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स (आरएसएसएमएफ) ने हूतियों के खिलाफ लड़ाई में चीन निर्मित डीएफ-१५ए शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। हालांकि, यह मिसाइल अपने लक्ष्य को भेदने में नाकाम रही और तकनीकी खराबी के कारण रेगिस्तान में गिर गई। हूती विद्रोहियों ने मिसाइल के बूस्टर फेयरिंग सहित उसके मलबे को कब्जे में ले लिया है।
​सऊदी अरब ने १९९० के दशक में चीन से ये बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदी थीं। लंबे समय से सेना के शस्त्रागार में शामिल होने के बावजूद इससे पहले कभी इनका इस्तेमाल युद्ध में नहीं किया गया था।
​यमन में पिछले तीन हफ्तों से अधिक समय से हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच भीषण जंग जारी है। इस दौरान हूतियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य तक पहुंच देने वाले रणनीतिक मोखा बंदरगाह शहर सहित कई अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया है। ज़मीनी लड़ाई में हूतियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सऊदी सेना ने हवाई हमले तेज कर दिए हैं।
​यमन में २०१४ से २०२२ तक चला गृहयुद्ध २०२२ के युद्धविराम के बाद कुछ शांत हुआ था। हालांकि, इस साल जुलाई से शुरू हुआ तनाव अगस्त के आखिरी हफ्ते से एक बार फिर भीषण युद्ध में बदल चुका है।

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