नई दिल्ली: भारतीय संसद के दोनों सदनों में मंगलवार को विपक्षी दलों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच कई अहम विधेयक पारित करा लिए गए। लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, २०२६ और केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, २०२६ बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित हो गए। केरल विधेयक के तहत राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। नीट प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे थे, जिसके कारण विधेयकों पर बहस नहीं हो सकी।
दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बीच ट्रिब्यूनल (अधिकरण) सुधार विधेयक, २०२६ को मंजूरी दे दी गई। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पेश करते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य अधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों, पारदर्शिता और न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है। इसमें एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय अधिकरण आयोग’ के गठन और सदस्यों के लिए ५ वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान किया गया है। सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा में शामिल न होने और सदन में हंगामा करने के लिए विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की है।









