संविधान हत्या दिवस: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों को दी श्रद्धांजलि

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बाेले ‘१९७५ का आपातकाल इतिहास का सबसे काला अध्याय’

नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने वर्ष १९७५ में देश में लगाए गए आपातकाल को भारतीय इतिहास का सबसे काला अध्याय करार दिया है। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर एक संदेश जारी करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन सभी वीर आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आपातकाल के क्रूर दौर का डटकर सामना किया और हमारे संविधान की मूल भावना को सुरक्षित रखा।
​उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अपने संदेश में आपातकाल के उस दौर को याद करते हुए लिखा, “१९७५ में घोषित आपातकाल एक ऐसा गंभीर अनुस्मारक है, जिसने हमारे संवैधानिक मूल्यों की कड़ी परीक्षा ली थी। उस दौर में नागरिक स्वतंत्रता को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया था, अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगा दिया गया था और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे के केंद्रीय स्तंभों व प्रमुख संस्थाओं को कमजोर किया गया था।”
​उन्होंने आगे कहा कि हमारा पवित्र संविधान ही देश के लिए एकमात्र मार्गदर्शक रोशनी है। हमें इसके पावन आदर्शों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को फिर से दोहराना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से आह्वान करते हुए कहा, “आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण जारी रखें, जिसकी जड़ें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित हों।”

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