नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र संघ की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बनीज ने एक विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत, इजराइल को सैन्य सहायता और हथियार भेजकर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है। ‘टॉर्चर एंड जेनोसाइड’ नाम की इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश करते हुए उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय इजराइल के कब्जे को गलत ठहरा चुका है, तब भारत का उसके साथ हथियारों का लेन-देन जारी रखना वैश्विक नियमों के खिलाफ है। उनके अनुसार, भारत की यह भूमिका न केवल कानूनी रूप से संदिग्ध है, बल्कि इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली भी कमजोर हो रही है।
रिपोर्ट में गाजा की भयावह स्थिति का जिक्र करते हुए इसे एक बड़े ‘यातना शिविर’ की संज्ञा दी गई है। अल्बनीज का कहना है कि इजराइल अक्टूबर २०२३ से व्यवस्थित तरीके से फिलिस्तीनियों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दे रहा है, जो केवल जेलों तक सीमित नहीं है। निगरानी तंत्र, ड्रोन और फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए आम लोगों के जीवन को पूरी तरह नियंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा और दोनों देशों के बीच की ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का हवाला देते हुए कहा कि भारत की ऐतिहासिक न्यायप्रिय सोच और वर्तमान सरकारी रुख में अंतर दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां कोलंबिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश इस स्थिति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत का इजराइल के प्रति समर्थन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।









