रेगिस्तान के बीच लाल पत्थरों की चमक

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भारत की ‘रेड सिटी’ बीकानेर जहाँ की गलियां देती हैं नेचुरल एसी का अहसास

जयपुर: भारत के राजस्थान राज्य का नाम आते ही कला, संस्कृति और विभिन्न रंगों से सजे शहरों की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर जेहन में उभर आती है। जिस तरह जयपुर को ‘पिंक सिटी’ और जोधपुर को ‘ब्लू सिटी’ के नाम से जाना जाता है, ठीक उसी तरह राजस्थान में थार रेगिस्तान के मध्य बसा एक ऐतिहासिक शहर भारत की ‘रेड सिटी’ यानी लाल शहर कहलाता है। इस गौरवशाली शहर का नाम बीकानेर है। वर्ष १४८८ में राजपूत राजकुमार राव बीका द्वारा स्थापित इस शहर को रेड सिटी नाम यूं ही नहीं मिला है। दरअसल, यहाँ के ऐतिहासिक किलों, महलों और आलीशान हवेलियों के निर्माण में प्रचुर मात्रा में लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पूरा शहर लालिमा से सराबोर दिखाई देता है। १८वीं और १९वीं शताब्दी के दौरान यहाँ के समृद्ध व्यापारियों ने एक हजार से अधिक भव्य हवेलियों का निर्माण कराया था, जिनमें ‘रामपुरिया हवेली’ अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
​बीकानेर में इस्तेमाल किए गए इन लाल पत्थरों की एक बेहद अनूठी और वैज्ञानिक खासियत है। रेगिस्तानी इलाके में जब दिन के समय तापमान ४८ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब ये पत्थर भीषण गर्मी को अपने भीतर अवशोषित कर लेते हैं और रात के समय उसे रिलीज करते हैं। इस प्राकृतिक संतुलन के कारण हवेलियों के भीतर का तापमान हमेशा आरामदायक और अनुकूल बना रहता है। इसके अलावा, पुराने शहर की घुमावदार और संकरी गलियों को इस वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया था कि रेगिस्तानी हवाएं इन गलियों से गुजरते समय संकुचित हो जाती थीं। इससे हवा की गति बढ़ जाती थी और गलियों के भीतर प्राकृतिक एयर कंडीशनिंग जैसा शीतल प्रभाव पैदा होता था। यह लाल पत्थर न केवल दिखने में बेहद खूबसूरत है, बल्कि मजबूती के लिहाज से भी बेजोड़ है, जो बिना किसी दरार के भयंकर रेगिस्तानी तूफानों और तापमान के उतार-चढ़ाव को आसानी से झेल लेता है।
​ऐतिहासिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी बीकानेर का इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। यहाँ की सबसे लोकप्रिय और भव्य संरचना ‘जूनागढ़ किला’ है, जिसे १६वीं शताब्दी में बनवाया गया था। राजस्थान के अधिकांश किलों के विपरीत, यह किला किसी पहाड़ी की चोटी पर न बनकर समतल मैदान पर बना है, जो अपने आप में स्थापत्य का एक अद्भुत उदाहरण है। प्राचीन काल में यह शहर मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) और गुजरात के बंदरगाहों के बीच के व्यापारिक मार्गों पर एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव हुआ करता था। इस व्यापारिक सुगमता ने बीकानेर को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध बनाया, जिसकी जीवंत बानगी आज भी इस लाल शहर की हर एक दीवार और धरोहर में साफ तौर पर देखी जा सकती है।

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