काठमांडू: लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों और खाद्य संकट का सामना कर रहे उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। रूस के साथ बढ़ते सैन्य सहयोग और हथियारों के निर्यात ने उत्तर कोरियाई अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है, जिससे तानाशाह किम जोंग-उन का शासन और अधिक मजबूत हो गया है।
दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक के अनुमानों के अनुसार, वर्ष २०२४ में उत्तर कोरिया की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर ३.७ प्रतिशत रही, जो पिछले आठ वर्षों में सबसे तेज वृद्धि है। विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग-उन के सत्ता में आने के बाद से उत्तर कोरियाई अर्थव्यवस्था फिलहाल अपने सबसे बेहतर दौर से गुजर रही है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, देश की लगभग ४५ प्रतिशत आबादी (करीब १.१ करोड़ लोग) अभी भी कुपोषण का शिकार है। हालांकि, फरवरी २०२२ में शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद उत्तर कोरिया ने रूस को गोला-बारूद और हथियारों की आपूर्ति शुरू की, जिससे प्योंगयांग की तिजोरी को भारी फायदा हुआ। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए करीब १५,००० सैनिक और श्रमिक भी भेजे हैं।
रूस से मिले वित्तीय और तकनीकी समर्थन के कारण उत्तर कोरिया के खनन, भारी उद्योग और मशीनरी निर्माण क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है। इसके अलावा चीन के साथ व्यापार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के ढीले पड़ने से भी अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिली है।
राजधानी प्योंगयांग में डिजिटल सेवाओं, जैसे मोबाइल ऐप से टैक्सी बुकिंग, आयातित इलेक्ट्रिक वाहनों और निर्बाध बिजली आपूर्ति में हुई वृद्धि से खपत के स्तर में सुधार के संकेत मिलते हैं। अपनी बेहतर होती आर्थिक स्थिति के बल पर उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) कार्यक्रमों को भी तेजी से आगे बढ़ाया है।










