नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत जी इस समय रूस के दौरे पर हैं। उनके इस अहम दौरे के दौरान भारत के सुप्रीम कोर्ट और रूसी फेडरेशन के सुप्रीम कोर्ट के बीच न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत हुए हैं। सीजेआई सूर्यकांत जी और रूस के मुख्य न्यायाधीश इगोर क्रास्नोव जी ने मॉस्को में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों की शीर्ष अदालतों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग बढ़ाने वाला यह अपनी तरह का पहला और अनूठा समझौता है।
इस समझौते के जरिए भारत और रूस की अदालतें सूचना तकनीक के अलावा अपने न्यायिक अनुभवों को भी एक-दूसरे के साथ साझा करेंगी। इसके तहत मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर काम किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के जजों के बीच न्यायिक अनुभव का आदान-प्रदान करना, अदालतों के कामकाज को आधुनिक सूचना तकनीक से जोड़ना और कोर्ट स्टाफ को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रोफेशनल ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाना शामिल है।
मॉस्को की बैठक में सीजेआई सूर्यकांत जी ने दोनों देशों की न्याय प्रणाली की समानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और रूस जैसे बड़े और विविधता से भरे सुंदर देशों में न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी का काम है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी कानूनी परंपराएं भले ही अलग-अलग इतिहास से बनी हैं, लेकिन आज भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट के सामने न्याय व्यवस्था में जनता का अटूट भरोसा बनाए रखने और तेजी से बदलती दुनिया के हिसाब से ढलने की चुनौती बिल्कुल एक जैसी है।
कोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल पर बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत जी ने एक बहुत बड़ी बात कही। उन्होंने साफ किया कि एआई अनुवाद करने और ट्रांसक्रिप्ट बनाने में जजों की मदद तो जरूर कर सकता है, लेकिन उसके पास जजों जैसा न्यायिक विवेक कभी नहीं हो सकता। तकनीक अदालतों तक पहुंच आसान बनाती है, पर न्याय देना हमेशा एक मानवीय प्रक्रिया ही रहेगी। उन्होंने भारत में चल रहे डिजिटल बदलावों जैसे ई-फाइलिङ, ऑनलाइन सुनवाई और ‘एक केस, एक डेटा’ जैसी सुंदर पहलों का भी जिक्र किया, जिससे आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।





