काठमांडु(नेत्र बिक्रम बिमली): प्रतिनिधि सभा में करीब दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्तासीन राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रासपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने अगले सप्ताह पड़ोसी देश भारत के दौरे पर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ‘बालेन’ के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद से नई दिल्ली से औपचारिक निमंत्रण पाने वाले लामिछाने सत्ताधारी दल के पहले उच्च स्तरीय नेता हैं। भारतीय कूटनीतिक विश्लेषकों और नीति निर्धारकों के अनुसार, नई दिल्ली लामिछाने के स्वागत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने की तैयारी कर रहा है, लेकिन काठमांडू की वर्तमान सत्ता द्वारा अपनाई जा रही कुछ विदेश नीतियों और कूटनीतिक प्रोटोकॉल पर उनसे स्पष्टीकरण भी मांग सकता है। प्रधानमंत्री शाह द्वारा कूटनीतिक मुलाकातों को बेहद सीमित रखने और विदेश नीति पर अपने पत्ते न खोलने के कारण, भारत सत्ताधारी दल के प्रमुख नेता के जरिए नई सरकार के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करेगा।
भारत के सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के निमंत्रण पर होने वाले इस तीन दिवसीय दौरे में लामिछाने के साथ उनके करीबी नेता सह-महासचिव विपिन कुमार आचार्य और सचिवालय सदस्य दीपक राज बोहरा भी दिल्ली जाएंगे। दिल्ली प्रवास के दौरान लामिछाने के भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और बीजेपी अध्यक्ष सहित कई शीर्ष अधिकारियों से राजनीतिक बातचीत करने की संभावना है। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने हाल ही में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से कहा था कि यह दौरा पार्टी स्तर पर हो रहा है और इसका प्रधानमंत्री से कोई संबंध नहीं है। बहरहाल, रासपा के नेताओं का मानना है कि अतीत की पारंपरिक शक्तियों से इतर एक नई राजनीतिक शक्ति के सत्ता में होने के कारण, भारत के साथ विशिष्ट संबंधों में स्पष्टता लाने के उद्देश्य से यह दौरा बेहद अहम है।
नई दिल्ली स्थित नेपाल मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर एसडी मुनि ने टिप्पणी की है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की कार्यशैली के कारण भारत-नेपाल संबंधों में एक ‘संवाद शून्यता’ देखी जा रही है, जिसे रवि जी दिल्ली आकर पाटने का प्रयास कर सकते हैं। दूसरी ओर, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त जनरल अशोक मेहता का मानना है कि प्रधानमंत्री शाह द्वारा भारतीय विदेश सचिव से मिलने से इनकार किए जाने के दावों के बाद प्रोटोकॉल का मुद्दा लामिछाने की बैठकों में उठ सकता है, क्योंकि भारत सरकार स्थापित नज़ीरों में बदलाव नहीं देखना चाहती। नेपाल-भारत मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक युवराज घिमिरे का कहना है कि नेपाल सरकार की ओर से रवि लामिछाने दिल्ली में कोई आधिकारिक प्रतिबद्धता जताने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन यह दौरा परिचयात्मक आदान-प्रदान का बेहतर अवसर देगा और यह संदेश भी जाएगा कि नेपाल में सत्ता के कई केंद्र और संवाद स्थापित करने के एक से अधिक बिंदु मौजूद हैं।










