राज्य बार काउंसिल चुनाव को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में तनाव

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कोलकाता: राज्य बार काउंसिल के चुनाव को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में दो दिन का वोटिंग युद्ध। सोमवार सुबह से ही कोलकाता हाईकोर्ट सहित राज्य के विभिन्न न्यायालयों में मतदान जारी रहा। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की कुल सीटों की संख्या २५ है, लेकिन इस बार चुनाव २३ सीटों पर हो रहा है।
इनमें १८ सीटों पर पुरुष उम्मीदवार हैं और ५ सीटों पर महिला उम्मीदवार। कोलकाता हाईकोर्ट सहित राज्य के सभी न्यायालयों में मंगलवार को भी मतदान प्रक्रिया जारी रही। बार काउंसिल की लड़ाई में तृणमूल समर्थित वकील उम्मीदवार २३ हैं, भाजपा समर्थित उम्मीदवार २२, वाम समर्थित उम्मीदवार १२ और निर्दलीय उम्मीदवार १८ हैं। कोलकाता हाईकोर्ट में मतदान के लिए तीन बूथ बनाए गए हैं।
लगभग ८० हजार वकीलों ने अपने मतदान का अधिकार प्रयोग किया। कोलकाता हाईकोर्ट से शुरू होकर जिला और महकुमा न्यायालयों में यह मतदान सुबह १० बजे से शाम ६ बजे तक चला। यह मतदान मतपत्र के माध्यम से लिया गया। राज्य के सभी न्यायालयों में एक साथ चुनाव होने के कारण मतगणना और परिणाम की घोषणा में कुछ समय लग सकता है, ऐसा वकीलों का मत है।
हालांकि, दूसरे दिन के चुनाव में वरिष्ठ वकील अरुण कुमार मैती ने मतदान की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने मीडिया से कहा कि मतदाता सूची में एक ही वकील का नाम हाईकोर्ट समेत चार जिला न्यायालयों में है, इसलिए मतदाता सूची को लेकर असंगति की शिकायत है। इसके साथ ही राज्य बार काउंसिल के कुछ प्रभावशाली लोगों के खिलाफ उनका आरोप है कि हाईकोर्ट में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो, इसके लिए प्रचार के समय उन्हें बाधा दी गई। इसके अलावा मतदान से पहले उम्मीदवारों के नाम चिट्ठियों के माध्यम से वकील कक्ष में पहुंचाए जा रहे थे, जिसका उन्होंने विरोध किया।
चुनाव लड़ाई में तृणमूल पैनल के नेतृत्व में वर्तमान अध्यक्ष अशोक कुमार देव हैं और उनके साथी के रूप में सिद्धार्थ मुखोपाध्याय, सुब्रत सरकार और अंशुमान मंडल जैसे अनुभवी वकील शामिल हैं। वहीं, विपक्षी गुट में कैलास तमोली, मिहिर दास और विश्वरूप चक्रवर्ती के साथ प्रमुख आकर्षण के रूप में अनुभवी वकील एवं सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य भी चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं।

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