नई दिल्ली: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने भारत सहित दुनिया के साठ देशों पर दस से साढ़े बारह प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। यूएसटीआर द्वारा ट्रेड एक्ट की धारा ३०१ के तहत जारी की गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ये देश अपने यहाँ वस्तुओं के उत्पादन में जबरन मजदूरी यानी फोर्स्ड लेबर को समाप्त करने और इससे जुड़े आयात प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उस व्यापक टैरिफ व्यवस्था को फिर से बहाल करने की कोशिश कर रहा है, जिसे इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया था। इस प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था के दायरे में भारत के अलावा चीन, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मैक्सिको जैसे अमेरिका के कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं, जो मिलकर अमेरिका के कुल आयात का लगभग निन्यानवे दशमलव चार प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर के अनुसार, अपने प्रमुख व्यापारिक भागीदारों द्वारा जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात की समस्या का समाधान न करना स्वीकार्य नहीं है क्योंकि इससे अमेरिकी कर्मचारियों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
इस नीति के तहत देशों को उनकी विफलता के आधार पर दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। भारत सहित उन चौवन अर्थव्यवस्थाओं पर दस प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव है जिन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामानों पर आंशिक व्यवस्था लागू की है या व्यापार समझौतों के तहत ऐसा करने का वादा किया है, जबकि कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ जैसे पूरी तरह विफल रहे क्षेत्रों पर साढ़े बारह प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ प्रस्तावित है। हालांकि, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव भी किया गया है जिसके तहत चुनिंदा देशों से आने वाले कपड़ों की एक निश्चित मात्रा को कम टैरिफ दर पर अमेरिका में प्रवेश मिल सकेगा। यह नए टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होंगे बल्कि इन पर आगामी छह जुलाई तक लिखित टिप्पणियां मांगी गई हैं और सात जुलाई से पैनल की सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी। इस बीच, भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत धारा ३०१ की इस पूरी प्रक्रिया को लेकर अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और प्रस्तावित टैरिफ से धारा २३२ के तहत पहले से शुल्क के दायरे में आने वाले उत्पादों को बाहर रखा गया है।









