यूएन महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ‘हिमालयन क्लाइमेट जस्टिस’ के लिए एकजुटता सभा आयोजित करने का डॉ. अधिकारी का सुझाव

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वाशिंगटन: संविधानविद् तथा वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. विपिन अधिकारी ने सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ (यूएन) की 81वीं महासभा में नेपाल का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के दौरान न्यूयॉर्क स्थित नेपाली समुदाय को ‘हिमालयन क्लाइमेट जस्टिस’ अर्थात हिमालयी जलवायु न्याय के पक्ष में एकजुटता सभा आयोजित करनी चाहिए।
सामाजिक मीडिया के माध्यम से अपनी धारणा सार्वजनिक करते हुए डॉ. अधिकारी ने कहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा यूएन में प्रस्तुत किए जाने वाले नेपाल के संदेश को जलवायुजनित आपदाओं से प्रभावित राष्ट्र के रूप में सहायता मांगने के विषय तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि जलवायु अन्याय झेल रहे राष्ट्र के रूप में नेपाल के न्यायोचित दावे के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया है कि प्रधानमंत्री द्वारा यूएन महासभा को संबोधित किए जाने वाले दिन ही न्यूयॉर्क में नागरिक स्तर पर हिमालयी जलवायु न्याय के पक्ष में एकजुटता सभा आयोजित की जा सकती है। उनका कहना है कि यूएन मुख्यालय के निकट डैग हैमरशोल्ड प्लाजा जैसे स्थानों पर व्यवस्थित रूप से कार्यक्रम आयोजित किया जा सके तो इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावी संदेश दिया जा सकता है।
डॉ. अधिकारी के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह या किसी राजनीतिक व्यक्ति के व्यक्तिगत समर्थन के रूप में नहीं, बल्कि नेपाल और समग्र हिमालय क्षेत्र द्वारा झेले जा रहे जलवायु संकट तथा जलवायु न्याय के पक्ष में नागरिक एकजुटता के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया है कि कार्यक्रम में नेपाली समुदाय के साथ-साथ भूटान, भारत के हिमालयी क्षेत्रों के समुदायों, तिब्बती तथा चीनी हिमालयी डायस्पोरा और जलवायु न्याय के पक्ष में काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय समूहों को भी शामिल किया जा सकता है। उनका तर्क है कि महासभा के भीतर उठाए जाने वाले नेपाल के मुद्दे को न्यूयॉर्क के नागरिक स्तर से उठने वाली आवाज के साथ जोड़ा जा सके तो इससे नेपाल के जलवायु न्याय संबंधी मुद्दे को अतिरिक्त नैतिक बल मिल सकता है।
मीडिया रणनीति के संदर्भ में भी डॉ. अधिकारी ने प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाने के बजाय स्पष्ट और एकसमान संदेश को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, ५०० लोगों को जुटाने के बजाय १०० से २०० लोग एक ही संदेश के साथ हिमालय की तस्वीरें, नेपाल–हिमालय का नक्शा, रसुवा सहित जलवायुजनित आपदाओं के दृश्य तथा प्रभावी अंग्रेजी प्लेकार्ड लेकर उपस्थित हों तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अधिक आकर्षित किया जा सकता है।
इसी तरह, उन्होंने आयोजकों को एक पृष्ठ का ‘न्यूयॉर्क हिमालयन क्लाइमेट जस्टिस डिक्लेरेशन’ जारी करने का सुझाव भी दिया है। उन्होंने उल्लेख किया है कि उक्त घोषणापत्र में जलवायु वित्त, ‘लॉस एंड डैमेज’ कोष, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, हिमनद निगरानी, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा तथा हिमालय क्षेत्रीय सहयोग सहित पाँच–छह स्पष्ट मांगों को शामिल किया जा सकता है।
डॉ. अधिकारी ने कहा है कि यदि ऐसी पहल सफल होती है तो यह न केवल नेपाल के लिए, बल्कि ‘हिमालयन क्लाइमेट जस्टिस’ की अवधारणा को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में स्थापित करने की दिशा में एक प्रतीकात्मक शुरुआत हो सकती है।

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