मौत को मात देकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुईं १८ वर्षीय नीट छात्रा सृष्टि

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आईएलएस हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी के बाद मिली छुट्टी

कोलकाता: कोलकाता के दमदम स्थित आईएलएस अस्पताल ने एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक सफलता की कहानी साझा की है। हावड़ा के लिलुआ की रहने वाली १८ वर्षीय नीट एस्पिरेंट सुश्री सृष्टि दुबे को एक बेहद जटिल और जीवन रक्षक कार्डियोथोरैसिक ट्रॉमा सर्जरी के बाद आज अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। यह उनके जीवन की जंग, अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प की एक बेमिसाल दास्तान है जिसने अस्पताल के डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया।
​एक भीषण सड़क हादसे के बाद सृष्टि को बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां उनके बाएं फेफड़े में गंभीर चोट थी, श्वास नली कट चुकी थी और चेहरे तथा हड्डियों में गंभीर फ्रैक्चर था। अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने लगातार ८ घंटे तक इमरजेंसी ऑपरेशन कर सृष्टि को नई जिंदगी दी। सर्जरी के कुछ ही दिनों बाद, जब सृष्टि रिकवरी की स्थिति में थीं, उन्होंने नीट परीक्षा में बैठने की इच्छा जताई। अस्पताल प्रशासन, डॉक्टरों की टीम और स्थानीय नागरिक अधिकारियों के अभूतपूर्व सहयोग से सृष्टि ने आईसीयू में मेडिकल सुपरविजन और ऑक्सीजन सपोर्ट के बीच अपनी परीक्षा दी, जो उनकी अदम्य इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
​इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व करने वाले कंसलटेंट कार्डियोथोरैसिक एंड वैस्कुलर सर्जन डॉ. समर्थ आचार्य ने कहा कि सृष्टि की नौ पसलियां टूट चुकी थीं, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। आज वह आईसीयू से बाहर अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं और उन्होंने डॉक्टरों की पूरी टीम को याद दिलाया कि हमारा काम सिर्फ जान बचाना नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करना भी है। आईएलएस अस्पताल के सीओओ बैश्पायन मुखर्जी ने पूरी टीम के २४ घंटे के अथक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सृष्टि ने एक सच्चे योद्धा का दिल दिखाया है। आज जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई, तो डॉक्टरों और नर्सों की पूरी टीम ने तालियों के साथ उनके इस जज्बे को सलाम किया।

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