मुख्यमंत्री का भवानीपुर में संबोधन: कड़े कानून, सुरक्षा और भर्ती में पारदर्शिता की घोषणा

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर के वोटरों को संबोधित करते हुए अपनी सरकार द्वारा लिए गए बड़े फैसलों और महत्वपूर्ण कदमों के बारे में खुलकर बात की है। भवानीपुर, जो कभी तृणमूल कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां साल २०२६ के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने पहली बार भवानीपुर के मतदाताओं के साथ इस विशेष बैठक में राज्य के विकास, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर कई बड़ी घोषणाएं कीं।
​अलीपुर में आयोजित एक बंद कमरे की बैठक में मुख्यमंत्री अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार ने पुराने जानवरों को मारने के नियमों को सख्त कर दिया है और नए एक्ट को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि वे संविधान से बंधे हुए हैं, इसलिए इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते, लेकिन समझदारों के लिए इशारा ही काफी है। बीजेपी (BJP) सरकार ‘पश्चिम बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट, १९५०’ को पूरी सख्ती से लागू कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक जगहों पर जानवरों को मारने पर रोक लगाना और मारने से पहले फिटनेस सर्टिफिकेट को अनिवार्य बनाना शामिल है। इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि सभी धर्मों को माना जाए, लेकिन सड़कों को ब्लॉक न किया जाए।
​पिछली सरकारों पर तीखा निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) के राज में पश्चिम बंगाल काफी पिछड़ गया था और उस समय सिर्फ पार्टी के दफ्तर ही बने। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार के समय राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति चलती थी और ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ का पैसा घुसपैठियों को दिया जा रहा था। घुसपैठ को रोकने के लिए अपनी सरकार के कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का सबसे पहला कदम बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को जमीन देना था ताकि बॉर्डर फेंसिंग (सीमा पर तारबंदी) को मजबूत किया जा सके। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जबकि हिंदू शरणार्थियों का स्वागत है।
​राज्य में कानून व्यवस्था के मोर्चे पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय न्याय संहिता पहले ही लागू हो चुकी है और राज्य में जनगणना का काम भी शुरू हो गया है। इसके साथ ही, आम लोगों का काम-धंधा प्रभावित न हो, इसके लिए विधानसभा से ‘एंटी-गुंडा बिल’ पास किया गया है। इस नए कानून के तहत यदि कोई गुंडा किसी की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो आरोपी से नुकसान का तीन गुना जुर्माना वसूला जाएगा। वहीं, पश्चिम बंगाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने पर सरकार का रुख दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी।
​मुख्यमंत्री अधिकारी ने सरकारी नौकरियों, विशेषकर स्कूल सर्विस कमीशन की भर्ती प्रक्रिया को राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रखने का पक्का वादा किया है। इसी कड़ी में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी राज्य के बेहद अनुभवी और सीनियर आईएएस अधिकारी तथा पूर्व चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि भर्ती कमीशन को राजनीतिक असर से आजाद करके यूपीएससी के मॉडल पर रीस्ट्रक्चर किया जाएगा। जब वित्त मंत्री ने बजट स्पीच में खाली पदों पर नियुक्तियों की घोषणा की थी, तब सरकार ने वादा किया था कि रिक्रूटमेंट से जुड़ी किसी भी कमेटी में कोई राजनीतिक हस्ती शामिल नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने अंत में दोहराया कि उनकी सरकार जनता से किए गए इस वादे को हर हाल में पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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