नई दिल्ली: विश्व युवा फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक गोथिया कप २०२६ में भारत की मिनर्वा एकेडमी ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। स्वीडन में आयोजित प्रतियोगिता के अंडर-१२ वर्ग के फाइनल में भारतीय युवा टीम मिनर्वा एकेडमी ने फुटबॉल की महाशक्ति माने जाने वाले ब्राजील के युवा क्लब ‘आरएस स्पोर्ट्स येलो’ को २–१ से पराजित कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। फाइनल मैच बेहद रोमांचक रहा, जिसमें बेहतरीन रणनीति का प्रदर्शन करते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने ब्राजीलियाई रक्षापंक्ति को ध्वस्त कर दिया। फाइनल में मिनर्वा एकेडमी की ओर से किपगेन थांगसांगलेन और मेखामखराव नोनग्रेम ने गोल किए। इस जीत को भारतीय युवा फुटबॉल इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि विश्व फुटबॉल में अपना मजबूत वर्चस्व रखने वाले देश ब्राजील के खिलाफ इस जीत ने भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता को विश्व मंच पर प्रमाणित किया है।
एक सप्ताह पहले ही हेलसिंकी कप जीतकर इतिहास रचने वाली मिनर्वा एकेडमी ने इस बार गोथिया कप भी अपने नाम कर ‘यूरोपियन डबल’ पूरा कर लिया है। पंजाब के मोहाली में स्थित इस निजी फुटबॉल एकेडमी की इस सफलता ने न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। इस ऐतिहासिक विजेता टीम में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से मणिपुर और मेघालय सहित देश के विभिन्न राज्यों से चुने गए प्रतिभावान युवा खिलाड़ियों की बहुलता थी। यह केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल का भविष्य सही और उज्ज्वल दिशा में आगे बढ़ने का एक मजबूत संकेत है।









