मणिपुर: मासूमों की मौत पर उबाल, न्याय के लिए मशालें लेकर सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं

M002

इंफाल: मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में उग्रवादियों के कायराना हमले में दो मासूम बच्चों सहित तीन लोगों की मौत के बाद राज्य में जबरदस्त जनाक्रोश देखा जा रहा है। ७ अप्रैल को हुए रॉकेट हमले में बेडरूम में सो रही छह महीने की बच्ची और पांच साल के लड़के की मौत के बाद से ही स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस घटना के विरोध में १८ अप्रैल से प्रभावी बंद ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है, वहीं अब ‘मेइरा पाइबी’ समुदाय की महिलाओं ने मशालें थामकर आंदोलन की कमान संभाल ली है।
​सड़कों पर उतरीं ये महिलाएं दिन के समय रास्तों को जाम करती हैं और रात में मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घर-परिवार की जिम्मेदारी और आजीविका के संघर्ष के बीच न्याय की यह लड़ाई उनके लिए अस्तित्व का सवाल बन गई है। बाजार में कुछ दुकानें खुली तो हैं, लेकिन दुकानदारों का स्पष्ट कहना है कि वे केवल आर्थिक मजबूरी के कारण दुकान खोल रहे हैं, जबकि उनका समर्थन पूरी तरह से आंदोलन को है।
​मणिपुर की सामाजिक शक्ति मानी जाने वाली ‘मेइरा पाइबी’ महिलाओं का यह समूह दशकों से मानवाधिकारों और कानून-व्यवस्था के लिए लड़ता रहा है। इस बीच, नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने २५ अप्रैल को एक बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि जिस समय उग्रवादियों ने घर पर बम फेंका, बच्चे अपनी मां के साथ सो रहे थे। इस हृदयविदारक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और समूचे मणिपुर को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।

About Author

Advertisement