नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का समझौते की तुलना नाटो के ‘आर्टिकल ५’ से करते हुए कहा है कि यदि तीनों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। गत ७ अगस्त को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
अल जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में एर्दोगन ने संकेत दिया कि मिस्र भी इस समझौते का हिस्सा बन सकता है और भविष्य में अन्य देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इस समझौते के तहत तीनों देशों के बीच रक्षा मंत्रियों, विदेश मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों को शामिल करते हुए उच्च स्तरीय रणनीतिक और सैन्य तंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास करने के साथ-साथ एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और तकनीक को साझा करेंगे।










