भोटेकोशी-त्रिशूली बाढ़ का आठवां दिन: संसद में प्रधानमंत्री और विपक्ष के बीच तीखी बहस, विशेष समिति के गठन की मांग

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काठमांडू: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के आठवें दिन प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह ‘बालेन’ ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत, बचाव और व्यवस्थापन कार्यों की जानकारी प्रतिनिधि सभा को दी। बुधवार को संसद बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने दावा किया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार निरंतर जुटी हुई है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए जमकर हमला बोला।
​संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि १० भदौ (२७ अगस्त) को बाढ़ आने से पहले ही सुबह ९ बजे तटीय क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया गया था और ९:३५ बजे एसएमएस के जरिए सतर्क किया गया था। उन्होंने बताया कि अब तक १,१०० से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से केवल ९५ की ही पहचान हो सकी है। पहचान न हो सके शवों का डीएनए और अन्य विवरण सुरक्षित रखते हुए उन्हें जमीन के नीचे दफनाकर प्रबंधित किया गया है। इसके अलावा ११,९९३ लोगों को सकुशल बचाया गया है, जबकि ३,९१६ लोग अभी भी लापता हैं।
​प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को छोटा किया गया है और शुरुआत से ही भारत और चीन की तकनीकी टीमें निगरानी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री दैवीय प्रकोप कोष में अब तक ७ अरब रुपये से अधिक तथा अतिरिक्त ६१ लाख ४१ हजार अमेरिकी डॉलर जमा हो चुके हैं।
​दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के नेता भीष्मराज आंगदेम्बे ने इस आपदा को “बाढ़ के रूप में आई प्रलयंकारी सुनामी” करार देते हुए कहा कि सरकार के हर कदम का आंख मूंदकर समर्थन नहीं किया जा सकता। आंगदेम्बे ने कहा, “आपदा के समय सरकार के साथ खड़े होने का मतलब यह नहीं कि सरकार के सभी कसूर माफ कर दिए जाएं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करके चुनाव तो जीता जा सकता है, लेकिन ऐसा गंभीर संकट हल नहीं होता। सरकार को धरातल पर अपनी प्रभावी मौजूदगी दिखानी होगी।”
​इसी तरह, नेकपा एमाले के संसदीय दल के नेता रामबहादुर थापा ने रसुवा में १० भदौ की सुबह को कालरात्रि बताते हुए कहा कि हर साल आपदा आने पर केवल श्रद्धांजलि देने की परंपरा को बदलना होगा। प्रधानमंत्री से अपनी कार्यशैली में सुधार करने का आग्रह करते हुए थापा ने बाढ़ राहत और पुनर्निर्माण की निगरानी के लिए एक ‘विशेष संसदीय समिति’ गठित करने का प्रस्ताव रखा।
​राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के संसदीय दल के नेता ज्ञानबहादुर शाही ने आरोप लगाया कि बचाव और राहत उपकरण जुटाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और आधुनिक तकनीक को लाने की अनुमति देने में सरकार ने ९६ घंटे की देरी की। संसद में तकनीक को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री के बयान को चुनौती देते हुए शाही ने कहा कि कीचड़ और सुरंगों के भीतर खोजबीन करने वाली तकनीक दुनिया भर में मौजूद है, इसलिए सरकार को बहानेबाजी बंद करनी चाहिए।

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