भारत में पहली बार ‘विश्व समावेशी सम्मेलन’

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‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ से ही समावेशी समाज संभव

​नई दिल्ली: भारत में पहली बार आयोजित ‘विश्व समावेशी सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए पूर्व भारतीय कूटनीतिज्ञ हर्षवर्धन शृंगला ने कहा कि एक समावेशी, मजबूत और एकजुट समाज के निर्माण के लिए भारत का सभ्यतागत दर्शन और नीतिगत प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
​सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया राजनीतिक और आर्थिक विखंडन की अनिश्चितता से जूझ रही है, ऐसे समय में भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की महान परंपरा और ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दृष्टिकोण वैश्विक समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है।
​उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने इन सिद्धांतों को केवल विचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी आंतरिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संबंधों के माध्यम से इन्हें धरातल पर उतारा है।
​इंटरनेशनल फोरम्स ऑफ इंक्लूजन प्रैक्टिशनर्स (आईएफआईपी) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में विषय विशेषज्ञों, विदेशी प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, शैक्षणिक संस्थानों के प्राचार्यों और युवाओं ने हिस्सा लिया। शृंगला ने कहा कि इस तरह के संवाद और सामूहिक प्रयास एक अधिक समावेशी और सामंजस्यपूर्ण विश्व के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

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