रिसिन से जहर फैलाने की कोशिश, यूएन रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली: भारत में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़ी कथित बायोटेरर साजिश का खुलासा होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता गहराई बढ़ गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर ‘रिसिन’ नामक जानलेवा जहरीले पदार्थ के जरिए बड़े पैमाने पर जहर फैलाने की योजना बनाई गई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम’ की हालिया रिपोर्ट में आईएसआईएस और अल-कायदा द्वारा रासायनिक व जैविक हथियारों में लगातार दिखाई जा रही दिलचस्पी का जिक्र किए जाने से खतरा और गंभीर हो गया है।
भारत में यह खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं रहा है। नवंबर २०२५ में गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वाड ने हैदराबाद के डॉक्टर सैयद अहमद मोहिउद्दीन और उत्तर प्रदेश के दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में जनवरी २०२६ में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जांच अपने हाथ में ली और मई २०२६ में तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मुख्य आरोपी मोहिउद्दीन ने हैदराबाद स्थित अपने घर को कथित तौर पर एक गुप्त लैब में बदल दिया था और विदेश में मौजूद आईएसआईएस हैंडलरों के संपर्क में रहकर काम कर रहा था। उसे टोल प्लाजा पर गैरकानूनी हथियार और चार लीटर कैस्टर ऑयल के साथ पकड़ा गया था।
ऑनलाइन माध्यमों से चरमपंथी सामग्री और जैविक जहर तैयार करने के निर्देशों के प्रसार ने सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ा दी है। पारंपरिक आतंकी हमलों को रोकने के अलावा, अब वैज्ञानिक जानकारी और जैविक सामग्रियों के जरिए तबाही मचाने की आईएसआईएस की कोशिशों को नाकाम करना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।









