नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए दोनों देशों ने सीधी तेल पाइपलाइन बिछाने और त्रिंकोमाली में एक विशाल तेल हब स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। भारतीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की श्रीलंका की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान इस रणनीतिक परियोजना पर मुहर लगी है। यह किसी भी भारतीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका की पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जो दोनों पड़ोसियों के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग को दर्शाती है।उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच कोलंबो में हुई उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा हुई। इस परियोजना के तहत त्रिंकोमाली बंदरगाह पर स्थित द्वितीय विश्व युद्ध के समय के तेल टैंकों का कायाकल्प किया जाएगा। खास बात यह है कि इस मल्टी-प्रोडक्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय ऊर्जा गलियारा बन जाएगा।विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे श्रीलंका जैसे आयात पर निर्भर देश प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यह पाइपलाइन परियोजना श्रीलंका की ईंधन संबंधी जरूरतों को किफायती और सुरक्षित तरीके से पूरा करने में मदद करेगी। वार्ता के दौरान बंदरगाह विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बिजली साझा करने के लिए पावर लाइन बिछाने जैसे विषयों पर भी गहन चर्चा हुई। राष्ट्रपति दिसानायके ने श्रीलंका के डिजिटल भविष्य के लिए भारत के तकनीकी सहयोग को अनिवार्य बताया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने भारतीय मछुआरों की रिहाई के लिए श्रीलंका सरकार का आभार भी प्रकट किया।










