बाढ़ प्रभावित माता-पिता के लिए प्रधानमंत्री का संदेश: आप अकेले नहीं हैं, राज्य और सरकार आपके साथ है

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काठमांडू: प्रधानमंत्री वालेन शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के माता-पिता से आग्रह किया है कि वे खुद को अकेला न समझें। उन्होंने कहा कि राज्य और सरकार उनके साथ हैं।
आज सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा, “आप अकेले नहीं हैं, राज्य आपके साथ है, सरकार आपके साथ है।”
उन्होंने कहा, “बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नुवाकोट के विदुर–10, बेत्रावती में आज सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल और नेपाल पुलिस की संयुक्त बचाव टीम द्वारा 64 वर्षीय चन्द्रिका श्रेष्ठ का उद्धार किए जाने की खबर ने पूरे देश को उम्मीद दी है।” उन्होंने कहा कि यह खबर इस बात का संदेश भी है कि खोज और बचाव अभियान में सरकार अभी भी पूरी तरह जुटी हुई है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार चन्द्रिका माता की उम्र के तथा उनसे अधिक उम्र वाले कई माता-पिता को प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाल चुकी है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान कई माता-पिता को अपनी जान की परवाह किए बिना कांपते हाथों से अपने पोते-पोतियों को सीने से लगाकर पहाड़ियों की ओर भागकर अपनी जान बचानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, जिन पैरों से बिना छड़ी के दो कदम चलना भी मुश्किल था, उन्हीं पैरों में उस समय अपने बच्चों को बचाने का अद्भुत साहस आ गया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि बाढ़ के कारण वृद्धाश्रमों में रह रहे माता-पिता को भी सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।
संदेश में कहा गया है, “बाढ़ आने से पहले तक आप अपने घर के आंगन में बैठकर नदी किनारे स्थित खेतों में अपने बेटे-बेटियों को काम करते हुए देख रहे होंगे। आप अपने पोते-पोतियों को हाथ हिलाते हुए स्कूल जाते हुए देखते होंगे। उनके लौटने की प्रतीक्षा में रास्ते की ओर नजर लगाए बैठे रहते होंगे।”
उन्होंने कहा कि चौतारी (बैठने की पारंपरिक जगह) पर पड़ोसियों के साथ वर्षों के दुख-सुख, अनुभव और ज्ञान साझा करने वाले बुजुर्गों की दिनचर्या भी बाढ़ से प्रभावित हुई है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि बाढ़ के कारण कुछ लोगों को अपनी आंखों के सामने अपने बच्चों और अपने कंधों पर पाल-पोसकर बड़े किए गए पोते-पोतियों को बहते हुए देखने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, कुछ लोगों ने अपने जीवनसाथी को खो दिया और पूरी तरह अकेले हो गए।
उन्होंने जानकारी दी कि नुवाकोट स्थित देवीघाट ज्येष्ठ नागरिक संरक्षण तथा अध्ययन प्रतिष्ठान, विदुर भवन के बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने के बाद वहां रह रहे सात माता-पिता को काठमांडू के नेपाल सीनियर केयर, म्हैपी में तथा १७ लोगों को नुवाकोट के इनारपाटी स्थित कृष्णप्रणामी मंदिर में अल्पकालिक आश्रय दिया गया है।

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