नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप २०२६ शुरू होने में अब केवल ५० दिन का समय शेष है। इस वैश्विक टूर्नामेंट को लेकर दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों में उत्साह बढ़ रहा है, लेकिन भारत में इसके प्रसारण को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, इस महा-आयोजन के ब्रॉडकास्ट राइट्स यानी प्रसारण अधिकार अभी तक बिक नहीं पाए हैं। आमतौर पर इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए टेलीविजन और डिजिटल अधिकारों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी जाती है, लेकिन इस बार स्थिति काफी अलग है। फीफा वर्ल्ड कप ११ जून से शुरू होगा और टूर्नामेंट के इतिहास में इस बार सर्वाधिक ४८ टीमें हिस्सा लेंगी। इसका आयोजन अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में किया जाएगा, जबकि फाइनल १९ जुलाई को खेला जाएगा। भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। यूरोपीय लीग से लेकर वर्ल्ड कप तक, दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के प्रसारण को लेकर अनिश्चितता दिखने से भारतीय फुटबॉल समुदाय की चिंता बढ़ गई है। यह अनिश्चितता कुछ महीने पहले की उस स्थिति की याद दिलाती है जब इंडियन सुपर लीग के आयोजन को लेकर भी असमंजस पैदा हुआ था। इस बार वर्ल्ड कप की ब्रॉडकास्ट डील समय पर न होने से खेल के प्रचार-प्रसार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इस पूरे मामले के पीछे मुख्य कारण ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की उच्च कीमत को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फीफा ने भारत के लिए जो मूल्य तय किया है, वह स्थानीय ब्रॉडकास्टर्स की उम्मीदों से कहीं अधिक है। फीफा ने ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की कीमत में भारी कटौती करते हुए इसे लगभग १०० मिलियन डॉलर से घटाकर ३५-४० मिलियन डॉलर कर दिया है, फिर भी कोई ब्रॉडकास्टर डील लेकर आगे नहीं आया है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोस्टार जैसे बड़े खिलाड़ी इस रेस में शामिल होने के बावजूद फिलहाल पीछे हट गए हैं। कम रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआई) और क्रिकेट में भारी निवेश जैसी चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई हैं। फुटबॉल में विज्ञापन के अवसर क्रिकेट की तुलना में सीमित होते हैं क्योंकि यह लगातार चलने वाला खेल है जिसमें ब्रेक कम होते हैं। इसके अलावा, भारतीय टीम की अनुपस्थिति भी विज्ञापनदाताओं को अधिक पैसा लगाने से रोकती है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स को यह सौदा उतना फायदेमंद नहीं लग रहा है। इसके साथ ही विश्व कप उत्तर अमेरिका महाद्वीप में खेला जाएगा, जिससे मैचों का समय भारतीय दर्शकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण बन गया है। मैच भारतीय समयानुसार आधी रात से सुबह तक खेले जाएंगे, जिसका सीधा असर व्यूअरशिप और विज्ञापन से होने वाली कमाई पर पड़ सकता है।
इस मामले में एक दिलचस्प संभावना यह भी है कि ब्रॉडकास्टर्स अंतिम समय तक प्रतीक्षा कर सकते हैं। २०२२ वर्ल्ड कप के दौरान भी ऐसा ही हुआ था जब जियोस्टार ने देरी से राइट्स खरीदकर मैचों की फ्री स्ट्रीमिंग की थी। इस रणनीति से उन्हें कम कीमत में अधिकार मिले और प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई। इस बार भी वही रणनीति अपनाई जा सकती है जहाँ अंतिम समय में डील फाइनल हो। भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट के तहत राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों को सार्वजनिक प्रसारक के साथ साझा करना जरूरी होता है। यह नियम आमतौर पर भारत से संबंधित मैचों पर लागू होता है, लेकिन यदि कोई निजी ब्रॉडकास्टर राइट्स नहीं खरीदता है, तो सरकार दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारण सुनिश्चित करने की कोशिश करती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रसार भारती इन राइट्स को हासिल करने के एक विकल्प के रूप में आगे आया है। वर्तमान स्थिति में भारत में २०२६ वर्ल्ड कप देखने के लिए कोई भी आधिकारिक टीवी चैनल या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तय नहीं हुआ है, जिससे प्रशंसकों के बीच चिंता बनी हुई है।









