बामेंडा: पोप लियो चतुर्दश ने दुनिया के शक्तिशाली देशों के नेताओं द्वारा युद्ध पर भारी धन खर्च करने की प्रवृत्ति की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि दुनिया में ‘कुछ तानाशाहों के कारण विनाश और लूटपाट हो रही है’ और ‘धार्मिक भाषा का उपयोग करके युद्ध को उचित ठहराने’ वाले नेताओं की भी निंदा की।
बामेंडा में गुरुवार को आयोजित एक शांति सभा में संबोधन करते हुए उन्होंने असामान्य रूप से कड़ी भाषा का प्रयोग किया। उनके अनुसार, “युद्ध के समर्थक यह भूल जाते हैं कि विनाश एक क्षण में हो सकता है, लेकिन पुनर्निर्माण के लिए पूरा जीवन भी पर्याप्त नहीं होता। वे हत्या और विनाश पर भारी धन खर्च करते हैं, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए आवश्यक संसाधन नहीं मिलते।” उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया ‘कुछ तानाशाहों द्वारा लूटी जा रही है’।
यह बयान डोनाल्ड ट्रम्पद्वारा सामाजिक माध्यमों पर पोप की बार-बार आलोचना के बाद आया है। ट्रंप ने पोप को “कमजोर” और “कट्टर वामपंथी प्रभाव में” बताया। पोप की अफ्रीका यात्रा के दौरान दोनों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दिया।
कैमरून के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम क्षेत्रों में लगभग एक दशक से चल रहे ‘अंग्लोफोन संकट’ में हजारों लोग मारे जा चुके हैं। वर्ष २०१७ में शुरू हुए इस संघर्ष में अलगाववादी समूह फ्रांसीसी भाषी बहुमत से अलग होने की मांग कर रहे हैं। इस संघर्ष में अब तक ६,५०० से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है और ७ लाख से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं।
पोप लियो की बामेंडा यात्रा को इस संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अलगाववादी समूहों ने उनकी यात्रा के दौरान तीन दिन के युद्धविराम की घोषणा की। उन्होंने स्थानीय संघर्ष के समाधान के लिए शांति, संवाद और न्याय का मार्ग अपनाने का आह्वान किया।









