पूर्वी भारत में एमएसएमई के बीच नाट्स को अपनाने की प्रक्रिया तेज

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युवाओं की रोजगार क्षमता और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा

कोलकाता: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था, बोर्ड ऑफ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग(बीओपीटी),
ईस्टर्न रीजन ने घोषणा की है कि उसका वार्षिक प्रमुख कार्यक्रम ‘रीजनल अप्रेंटिसशिप डे २०२६’ आगामी ५ सितंबर २०२६ को आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष के कार्यक्रम का केंद्रीय विषय है: “राष्ट्रीय शिकाऊ प्रशिक्षण योजना(नाट्स) के माध्यम से एमएसएमई को सशक्त बनाना: संरचित अप्रेंटिसशिप के जरिए क्षेत्रीय विकास को गति देना।”
​इस कार्यक्रम की घोषणा बीओपीटी, ईस्टर्न रीजन के निदेशक डॉ. एस.एम. एजाज अहमद और प्रशासनिक-सह-लेखा अधिकारी श्री कैलाश नाथ मिश्रा द्वारा की गई। रीजनल अप्रेंटिसशिप डे २०२६ के माध्यम से संस्था का उद्देश्य नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम की पहुंच बढ़ाना, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच की दूरी को कम करना तथा पूर्वी भारत के युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना है।
​एमएसएमई के लिए संरचनात्मक समाधान
​बीओपीटी, ईस्टर्न रीजन ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा सामना की जा रही अनुपालन संबंधी जटिलताओं, जागरूकता की कमी और सीमित क्षमता जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपनी क्षेत्रीय विकास रणनीति के केंद्र में रखा है।
​संस्था के निदेशक डॉ. एस.एम. एजाज अहमद ने बताया कि इस वर्ष की पहल का एक मुख्य उद्देश्य अप्रेंटिसशिप व्यवस्था में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाना है। क्लस्टर आधारित अप्रेंटिसशिप मॉडल और सरल पंजीकरण प्रक्रिया जैसे व्यावहारिक समाधानों के माध्यम से इन बाधाओं को कम करने और एमएसएमई के लिए आर्थिक रूप से व्यावहारिक अप्रेंटिसशिप के अवसर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
​प्रमुख रणनीतिक पहल और नए ढांचे
​अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री या डिप्लोमा प्रोग्राम के माध्यम से विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में व्यापक बदलाव किया जा रहा है। इसे नेशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाया जा रहा है, जिससे छात्रों को कार्यस्थल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए औपचारिक अकादमिक क्रेडिट प्राप्त हो सकेगा।
​इसके अतिरिक्त, नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम के प्रशिक्षण मॉड्यूल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल कार्यप्रणाली को शामिल करके इसे अद्यतन किया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुकूल बन सके।
​कार्यक्रम का सीधा प्रसारण ६०,००० से अधिक हितधारकों तक पहुंचाया जाएगा। इसके माध्यम से छोटे औद्योगिक क्षेत्रों, दूरदराज के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और अंतिम वर्ष के छात्रों को जोड़ा जाएगा। संस्था ने वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में ही १,४५,००० से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया है और १५,०००,००० से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण देने के अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
​विभिन्न हितधारकों की सहभागिता
​५ सितंबर २०२६ को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम इस क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा। बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एसोचैम और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री जैसे प्रमुख कॉरपोरेट नेटवर्क कॉरपोरेट साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए भाग लेंगे।
​नीतिगत समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रमुख सदस्य और राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। इस अवसर पर कौशल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, शैक्षणिक संस्थानों, कॉरपोरेट प्रतिष्ठानों और एमएसएमई को सम्मानित भी किया जाएगा।

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