पाकिस्तान में ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात

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नई दिल्ली: पाकिस्तान ने ऊर्जा संकट को देखते हुए बड़े पैमाने पर कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। सरकारी खर्चों और गाड़ियों को मिलने वाले ईंधन में कटौती की गई है। नेताओं और अधिकारियों के विदेश दौरों पर पाबंदी लगाई गई है। इसके साथ ही अधिकतर सरकारी कर्मचारियों को घरों से काम करने को कहा गया है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पाकिस्तान भयंकर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। इस कारण पाकिस्तान ने ८० फीसदी सरकारी गाड़ियों को दो महीने के लिए बंद कर दिया है और उनके तेल में कटौती की है। वहीं, आधे सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया गया है। पाकिस्तान के स्कूलों में भी दो हफ्ते के लिए छुट्टियों का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही, सरकारी खर्च में २० फीसदी कटौती करने का फैसला भी किया गया है।
शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है, “दो महीने के लिए सरकारी महकमों की गाड़ियों को मिलने वाले तेल में ५० फीसद की कटौती की जा रही है, मगर इसमें एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाली बसें शामिल नहीं हैं। आने वाले दो महीने के लिए सरकारी महकमों की ६० फीसदी गाड़ियों को बंद किया जा रहा है, ताकि तेल की बचत हो। अगले दो महीने के लिए कैबिनेट के सदस्य, अधिकारी वेतन नहीं लेंगे। सांसदों की सैलरी में २५ फीसदी की कटौती की जा रही है। २० ग्रेड या इसके ऊपर के अधिकारी, जिनका वेतन ३ लाख से ज्यादा है, उनके दो दिन के वेतन की कटौती करके नागरिक रिलीफ के लिए खर्च किए जाएंगे।”
पाकिस्तान में प्रतिबंधों की बौछार:
सरकारी महकमों के वेतन के अलावा किए जाने वाले खर्च में २० फीसदी की कमी की जा रही है। सरकारी महकमों में गाड़ियों, फर्नीचर, एयर कंडिशनर की खरीद पर पाबंदी लगाई गई है। सरकारी अफसरों और नेताओं के विदेश दौरे पर पाबंदी लगा दी गई है। हालांकि, इनमें देश के लिए जरूरी विदेश यात्राओं के लिए छूट दी गई है। इस प्रतिबंध में प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और गवर्नरों को भी शामिल किया गया है। टेली कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग को तरजीह देने का ऐलान किया गया है, ताकि ईंधन की बचत की जा सके। सरकारी उत्सवों और इफ्तार पार्टियों पर भी पाबंदी लगा दी गई है। सरकारी खर्च में कमी के लिए सेमीनार और कॉन्फ्रेंसेज होटलों के बजाए सरकारी जगहों पर आयोजित किए जाएंगे।
पाकिस्तान में ऊर्जा संकट पर क्या-क्या कटौती की गई?
सरकारी महकमों की गाड़ियों को मिलने वाले तेल में ५० फीसद की कटौती।
सरकारी महकमों की ६० फीसदी गाड़ियों को बंद किया जा रहा।
शहबाज शरीफ कैबिनेट के सदस्य, अधिकारी वेतन नहीं लेंगे।
सांसदों की सैलरी में २५ फीसदी की कटौती की जा रही।
२० ग्रेड या इसके ऊपर के अधिकारी, जिनका वेतन ३ लाख से ज्यादा है, उनके दो दिन के वेतन की कटौती।
सरकारी महकमों के वेतन के अलावा किए जाने वाले खर्च में २० फीसदी की कमी।
सरकारी महकमों में गाड़ियों, फर्नीचर, एयर कंडिशनर की खरीद पर पाबंदी।
सरकारी अफसरों और नेताओं के विदेश दौरे पर पाबंदी।
टेली कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग को तरजीह देने का ऐलान।
सरकारी उत्सवों और इफ्तार पार्टियों पर भी पाबंदी।
सेमीनार और कॉन्फ्रेंसेज होटलों के बजाए सरकारी जगहों पर आयोजित किए जाएंगे।
पाकिस्तान के आईएमएफ फंडिंग पर संकट:
इस बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान को मिलने वाली आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) फंडिंग की अगली किस्त खतरे में पड़ गई है। आईएमएफ की एक टीम इस समय पाकिस्तान के दौरे पर है और वह देश की अर्थव्यवस्था की तीसरी समीक्षा कर रही है। इस समीक्षा के बाद ही अगली फंडिंग जारी होगी। टीम यह देख रही है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से लिए जा रहे आर्थिक फैसले उन शर्तों के अनुसार हैं या नहीं, जो आईएमएफ ने तय की हैं, ताकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधर सके और वह कर्ज चुका सके।पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की शर्तें मानना मुश्किल हुआ।
अफगानिस्तान के साथ चल रहा युद्ध और बढ़ता हुआ सैन्य खर्च इन शर्तों को पूरा करना मुश्किल बना रहा है। इससे देश में निवेश का माहौल खराब हुआ है और महंगाई भी बढ़ गई है। ये सभी बातें आईएमएफ की टीम ध्यान में रखेगी जब वह यह तय करेगी कि पाकिस्तान को आगे कर्ज दिया जाए या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान जैसे देश के लिए आईएमएफ से मदद पाने के कुछ जरूरी नियम होते हैं, जैसे आर्थिक सुधारों को जारी रखना, संरचनात्मक बदलाव करना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना। किसी बड़ी सीमा पर युद्ध होना इन सभी चीजों पर नकारात्मक असर डालता है और उन आर्थिक आंकड़ों को बिगाड़ देता है जिनकी आईएमएफ सबसे ज्यादा जांच करता है।

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