पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा एक्शन

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सीएम शुभेंदु अधिकारी की कड़ी चेतावनी के बाद बांग्लादेशियों का उलटा पलायन शुरू

​नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नवगठित भाजपा सरकार ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अपनी रणनीति ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ (पहचान करो, नाम हटाओ और देश से निकालो) के तहत एक बेहद कड़ा और व्यापक अभियान छेड़ दिया है। इस प्रशासनिक सख्ती के बाद पूरे राज्य के सीमावर्ती इलाकों में भारी हलचल मच गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद सार्वजनिक रूप से साफ और सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अवैध रूप से रह रहे लोग जल्द से जल्द भारत छोड़ दें, अन्यथा सरकार अपने स्तर पर सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री की इस सीधी चेतावनी का जमीन पर तत्काल और बड़ा असर देखने को मिला है, जिससे घुसपैठियों में डर का माहौल पैदा हो गया है और उनका अपने देश की ओर उलटा पलायन शुरू हो चुका है।
​उत्तर २४ परगना जिले के स्वरूपनगर क्षेत्र के पास स्थित बिथारी-हाकिमपुर बॉर्डर पर एक अभूतपूर्व दृश्य देखा गया, जहाँ सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना वैध दस्तावेजों के वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने इन लोगों को हिरासत में लिया और तय प्रक्रिया के तहत उन्हें ‘बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश’ को सौंपने की औपचारिक कार्रवाई शुरू की। इस कड़े रुख के बीच कई बांग्लादेशी नागरिकों ने होल्डिंग सेंटर्स की प्रताड़ना या जेल जाने के डर से खुद ही स्वेच्छा से वापस लौटने का फैसला किया है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में सालों से बिना दस्तावेजों के घरेलू काम और मजदूरी कर रहे कई नागरिकों का कहना है कि वे किसी कानूनी पचड़े में फंसे बिना खुद ही अपने घर लौट रहे हैं।
​इस पूरे अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों में दो अत्याधुनिक होल्डिंग सेंटर्स की शुरुआत की जा चुकी है, जहाँ पहले ही दिन एक दर्जन से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशियों को शिफ्ट किया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस प्रशासन को विशेष निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अवैध घुसपैठियों को बार-बार अदालत भेजने या लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझाने की आवश्यकता नहीं है; पुलिस उन्हें सीधे हिरासत में लेकर बीएसएफ को सौंप सकती है। भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय समझौते के तहत सीमा सुरक्षा बल इन संदिग्धों की पहचान, फिंगरप्रिंट और फोटोग्राफ का सत्यापन कर सीधे बीजीबी को सौंप देगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सख्त कानून देश और राज्य के हित में पहले से मौजूद था, लेकिन कुछ ताकतों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण इसे कभी लागू नहीं होने दिया।

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