यात्रा से पहले पीएमओ की अनुमति अनिवार्य
काठाण्डु(नेत्र बिक्रम बिमली):
नेपाल सरकार ने सिविल और सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा को व्यवस्थित और किफायती बनाने के लिए लागू मापदंडों को और कड़ा कर दिया है। विदेश यात्रा के नाम पर होने वाले मनमाने मनोनयन और बजट के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय ने यह कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने देश के सभी मंत्रालयों, संवैधानिक आयोगों और सरकारी निकायों को परिपत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी विदेश यात्रा के लिए कर्मचारियों का मनोनयन करने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी। पूर्व अनुमति के बिना की जाने वाली किसी भी विदेश यात्रा और मनोनयन पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए इस नई व्यवस्था को सख्ती से लागू किया गया है।
इसके साथ ही, विदेश यात्रा से हासिल सीख और ज्ञान का सरकारी तंत्र के भीतर संस्थागत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी नया नियम बनाया गया है। अध्ययन, प्रशिक्षण, बैठक, संगोष्ठी, कार्यशाला या सम्मेलन में भाग लेकर लौटने वाले कर्मचारियों को अपने द्वारा हासिल ज्ञान, कौशल और बेहतरीन अभ्यासों को सहकर्मियों के साथ अनिवार्य रूप से साझा करना होगा।
नए मापदंडों के अनुसार, विदेश यात्रा पूरी कर कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के 5 दिनों के भीतर संबंधित कर्मचारी को अपने निकाय के सहकर्मियों के बीच अनुभव और सीख साझा करना अनिवार्य होगा।









