नेपाल में बाढ़ का कहर
शव नहीं मिलने पर भी परिवार करने लगे प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन सैकड़ों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि, तलाश अभियान लंबा खिंचने के साथ कई परिवारों ने अपने परिजनों के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी है। शव नहीं मिलने के बावजूद वे हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। लापता व्यक्ति का पुआल का पुतला बनाकर उसका दाह संस्कार किया जा रहा है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। सरकारी अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि आपदा का स्तर कल्पना से परे है और अब वास्तविकता का सामना करना होगा। प्रभावित क्षेत्रों तक राहत और बचाव दल को पहुंचने में १२ घंटे से अधिक समय लगा।
लापता लोगों की तलाश के दौरान जलविद्युत परियोजनाओं की मिट्टी और मलबे से दबी सुरंगों में भी बचाव अभियान जारी है। कहीं ड्रिलिंग तो कहीं विस्फोट कर रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सुरंगों से अब तक कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला है, हालांकि कुछ शव बरामद किए गए हैं।
काठमांडू में लापता परिजनों की पहचान के लिए बड़ी संख्या में लोग डीएनए नमूने देने पहुंच रहे हैं। शवगृहों में जगह की कमी के कारण कुछ शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
अपने पति के लापता होने के बाद प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने वाली डोल्मा नेवार तामांग ने कहा कि आत्मा की शांति के लिए यह संस्कार करना जरूरी था।
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन सैकड़ों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हालांकि, तलाश अभियान लंबा खिंचने के साथ कई परिवारों ने अपने परिजनों के जीवित मिलने की उम्मीद छोड़नी शुरू कर दी है। शव नहीं मिलने के बावजूद वे हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। लापता व्यक्ति का पुआल का पुतला बनाकर उसका दाह संस्कार किया जा रहा है।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले की स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। सरकारी अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि आपदा का स्तर कल्पना से परे है और अब वास्तविकता का सामना करना होगा। प्रभावित क्षेत्रों तक राहत और बचाव दल को पहुंचने में १२ घंटे से अधिक समय लगा।
लापता लोगों की तलाश के दौरान जलविद्युत परियोजनाओं की मिट्टी और मलबे से दबी सुरंगों में भी बचाव अभियान जारी है। कहीं ड्रिलिंग तो कहीं विस्फोट कर रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सुरंगों से अब तक कोई जीवित व्यक्ति नहीं मिला है, हालांकि कुछ शव बरामद किए गए हैं।
काठमांडू में लापता परिजनों की पहचान के लिए बड़ी संख्या में लोग डीएनए नमूने देने पहुंच रहे हैं। शवगृहों में जगह की कमी के कारण कुछ शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
अपने पति के लापता होने के बाद प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार करने वाली डोल्मा नेवार तामांग ने कहा कि आत्मा की शांति के लिए यह संस्कार करना जरूरी था।





