नेपाल: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ९०३ शव मिले

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४ हजार २०० अब भी लापता, राहत एवं बचाव कार्य में भारत, चीन सहित विभिन्न देशों की टीमें तैनात

काठमांडू: नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों से अब तक ९०३ लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग ४ हजार २०० लोग अभी भी लापता हैं।
मंत्रालय में आयोजित
नियमित पत्रकार सम्मेलन में प्रवक्ता लोकबहादुर पौडेल क्षेत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों से ३२३ से अधिक विदेशी नागरिकों सहित १०हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। उनके अनुसार ३८ देशों के लगभग ५९० विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं। प्रवक्ता क्षेत्री ने बताया कि सरकार ने लोगों की जान बचाने, लापता लोगों की तलाश एवं बचाव, तत्काल राहत उपलब्ध कराने तथा प्रभावित नेपाली और विदेशी नागरिकों को आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है।
उन्होंने बताया कि इसके लिए नेपाल सरकार के उपलब्ध संसाधनों और साधनों को तलाश, बचाव, राहत तथा पुनर्वास कार्य में लगाया गया है। तलाश, बचाव और राहत के लिए आवश्यक सामग्री एवं संसाधनों का आकलन, अनुरोध, प्राप्ति तथा परिचालन के लिए पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्रवक्ता क्षेत्री के अनुसार राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण, नेपाल पर्यटन बोर्ड और अन्य संबंधित निकायों से प्राप्त अद्यतन एवं सत्यापित आंकड़े मंत्रालय की वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने मीडिया से अपील की कि अप्रमाणित सूचनाओं के आधार पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित न करें।
विदेश मंत्रालय का आपातकालीन नियंत्रण कक्ष लापता विदेशी नागरिकों के परिवारों तथा संबंधित निकायों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार नेपाली राजनयिक मिशन भी सत्यापित सूचनाओं के आदान-प्रदान, परिवारों से संपर्क में सहूलियत, आवश्यक सहायता तथा शवों की पहचान और उन्हें स्वदेश वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।
तलाश एवं बचाव के लिए नेपाल के सुरक्षा निकायों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं की संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं। भारत से आई टनल रेस्क्यू संबंधी विशेष तकनीकी टीम मैलुङ, चिलिमे और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में काम कर रही है।
चीन की टीम ऊपरी त्रिशूली–3 ‘ए’ के लुकु क्षेत्र में तथा दक्षिण कोरिया की टीम भी घटनास्थल पर तैनात है। शवों के प्रबंधन के लिए एयरटाइट बैग प्राप्त हो चुके हैं और अतिरिक्त बैग आने की प्रक्रिया में हैं। डीएनए विश्लेषण में विशेषज्ञता रखने वाली भारत की १८ सदस्यीय फोरेंसिक विशेषज्ञ टीम २९ अगस्त से नेपाल में कार्यरत है। सिंगापुर से आपदा पीड़ित पहचान (डिविआईं ) टीम तैनात करने के लिए भी समन्वय किया जा रहा है।
नेपाल ने बताया है कि भारत, चीन, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न देशों और साझेदार संस्थाओं से तलाश एवं बचाव कार्य में सहयोग प्राप्त हो चुका है।
प्राप्त सहायता में ब्रिज यूनिट, फ्रीजर, जनरेटर, सोलर लैंप, डीएनए परीक्षण किट, आपातकालीन राहत उपकरण, टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाद्य सामग्री और दवाइयां शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार फ्रीजर, डीएनए परीक्षण किट, अमेरिका से लिडार तकनीक, सिंगापुर से डीवीआई सामग्री, बेली ब्रिज तथा चीन और सिंगापुर से उच्च क्षमता वाले ड्रोन सहित अतिरिक्त गैर-खाद्य सामग्री के लिए अनुरोध किया गया है। जापान और दक्षिण कोरिया से भी अतिरिक्त सामग्री मिलने की उम्मीद है।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का कार्य जारी है। प्रवक्ता क्षेत्री ने बताया कि भारत, चीन और यूएई से राहत सामग्री प्राप्त हो चुकी है, जबकि यूएई, म्यांमार, अमेरिका, कतर, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया और सिंगापुर सहित विभिन्न देशों से अतिरिक्त सामग्री आने की प्रक्रिया में है।
नेपाल सरकार ने सहयोग और एकजुटता व्यक्त करने वाले मित्र देशों तथा साझेदारों के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्रालय ने बताया कि बचाव और राहत कार्य के उच्चस्तरीय समन्वय में प्रधानमंत्री स्वयं प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।
यह भी जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री ने २६ अगस्त को भारतीय प्रधानमंत्री तथा २८ अगस्त को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बातचीत की थी। सरकार ने बताया कि विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, सरकार प्रमुखों, विदेश मंत्रियों तथा अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की ओर से सैकड़ों संवेदना संदेश और सहायता की प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई हैं।
चीन में रह रहे नेपाली नागरिकों की स्थिति के बारे में मंत्रालय तथा बीजिंग और ल्हासा स्थित नेपाली राजनयिक मिशन लगातार सूचनाएं एकत्रित, आकलन और आदान-प्रदान कर रहे हैं। चीनी पक्ष ने हिल्सा तथा अन्य सीमा नाकों से तिब्बत में रह रहे नेपाली नागरिकों को नेपाल लौटने में सुविधा प्रदान की है।
इसी तरह जलविज्ञान एवं मौसम संबंधी आंकड़ों, बाढ़ के जोखिम, हिमस्खलन, हिमताल तथा जलजनित आपदाओं से संबंधित सूचनाओं का नेपाल और चीन के बीच रियल-टाइम में आदान-प्रदान किया जा रहा है।
जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है तथा जो लंबे समय तक पानी में रहने के कारण सड़-गल गए हैं, उन्हें अस्थायी रूप से दफनाया गया है। मंत्रालय ने बताया कि शवों को दफनाने से पहले मेडिकल टीम ने प्रत्येक मृतक का डीएनए नमूना लिया है। परिवार बाद में शव की पहचान कर सके और आवश्यक धार्मिक संस्कार कर सके, इसके लिए शवों के प्रबंधन में निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है।
प्रवक्ता क्षेत्री ने बताया कि नेपाल को तत्काल बचाव कार्य के लिए तकनीकी और उपकरण संबंधी सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने टनल रेस्क्यू टीम, मलबे में दबे शवों का पता लगाने के लिए लिडार तकनीक, शवों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर तथा डीएनए विश्लेषण और फोरेंसिक सहायता को तत्काल आवश्यकताओं के रूप में बताया।
मंत्रालय ने बताया कि नेपाल सरकार के ‘प्रधानमंत्री दैवी प्रकोप उद्धार कोष’ में देश-विदेश में रहने वाले नेपाली और विदेशी नागरिक क्यूआर कोड के माध्यम से सहायता कर सकते हैं।
सहायता राशि देने से पहले दाताओं से क्यूआर कोड तथा संबंधित लिंक की आधिकारिकता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।

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