नकली दवाओं और ई-फार्मेसी के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल

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देशभर के १२ लाख से ज्यादा केमिस्ट सड़कों पर उतरे

कोलकाता: अवैध ऑनलाइन ई-फार्मेसी और मार्केट में नकली दवाओं के बढ़ते जाल के खिलाफ देशभर के दवा व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया। ‘ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स’ (एआईओसीडी) द्वारा २० मई को बुलाई गई २४ घंटे की देशव्यापी हड़ताल पूर्ण रूप से आयोजित की गई। इस बंद को ‘बंगाल केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन’ (बीसीडीए) ने भी अपना पूरा समर्थन दिया था।
​बीसीडीए का सीधा आरोप था कि ऑनलाइन दवा बिक्री में बढ़ती अनियमितता, नकली दवाओं का प्रसार और ‘प्रिडेटरी प्राइसिंग’ (बाजार को बिगाड़ने वाली भारी छूट) अब पब्लिक हेल्थ के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा बन चुके हैं। संगठन के मुताबिक, इस हड़ताल के कारण देशभर की १२ लाख से ज्यादा दवा दुकानें बंद रहीं। एआईओसीडी ने इस विस्फोटक मुद्दे को लेकर पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर सख्त कदम उठाने की मांग की थी।
​यही नहीं, दवा संगठनों ने केंद्र सरकार से ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, १९४०’ के तहत जारी उस नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसमें कोरोना काल के दौरान दवाओं की होम डिलीवरी की छूट दी गई थी।
​संगठन का साफ कहना था कि बिना किसी सख्त निगरानी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर धड़ल्ले से दवाओं का बेचना मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। इस महाहड़ताल के जरिए सरकार पर सख्त नियम लागू करने और अवैध ई-फार्मेसी पर पूरी तरह नकेल कसने का भारी दबाव बनाया गया।

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