दुर्गा पूजा के अवसर पर टाटा पावर सोलारूफ का ‘घर-घर सोलर’ अभियान

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बिना अग्रिम भुगतान छत पर लगवा सकेंगे सौर ऊर्जा प्रणाली

कोलकाता: टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली टाटा पावर सोलारूफ ने पश्चिम बंगाल में ‘घर-घर सोलर’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से अगले तीन वर्षों में राज्य के तीन लाख घरों में रूफटॉप सोलर प्रणाली लगाने को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने बताया कि परिवारों की जरूरतों के अनुसार एक किलोवाट से लेकर १० किलोवाट तक की सौर ऊर्जा प्रणालियां उपलब्ध कराई जाएंगी।
दुर्गा पूजा के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य सौर ऊर्जा को अधिक सुलभ, सुविधाजनक और किफायती बनाना है। इसके तहत छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली लगवाने के लिए बिना किसी अग्रिम भुगतान के वित्तीय सुविधा प्राप्त की जा सकेगी। इसके साथ ही किफायती मासिक किस्तों और भुगतान के लचीले विकल्पों की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
पश्चिम बंगाल में आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी ने सौर ऊर्जा के उपयोग का विस्तार करने की योजना बनाई है। पात्र आवासीय ग्राहक भारत सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत सरकारी सब्सिडी का लाभ भी उठा सकेंगे।
योजना के अनुसार, एक किलोवाट क्षमता की सौर प्रणाली पर ३०,००० रुपये, दो किलोवाट की प्रणाली पर ६०,००० रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता की प्रणाली पर अधिकतम ७८,००० रुपये तक की केंद्रीय सब्सिडी मिल सकती है। यह लाभ संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित शर्तों के अधीन होगा।
सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने में शुरुआती खर्च की बाधा को कम करने के लिए टाटा पावर ने एरेम कंपनी के साथ साझेदारी में एक विशेष वित्तीय योजना शुरू की है। इसमें बिना अग्रिम भुगतान के प्रणाली लगवाने, मासिक किस्तों में भुगतान, लचीले पुनर्भुगतान विकल्प और सौर बीमा की सुविधा शामिल है।
कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, ६० महीने की अवधि के लिए एक किलोवाट की प्रणाली पर सब्सिडी से पहले मासिक किस्त १,९६८ रुपये और सब्सिडी के बाद अनुमानित किस्त १,२१४ रुपये होगी। इसी तरह, दो किलोवाट की प्रणाली पर सब्सिडी के बाद मासिक किस्त २,४२७ रुपये, तीन किलोवाट पर ३,४५१ रुपये, पांच किलोवाट पर ५,९११ रुपये और १० किलोवाट पर १२,३०९ रुपये होगी। ये राशि अनुमानित हैं और लागू सब्सिडी तथा अन्य शर्तों के अनुसार इनमें बदलाव हो सकता है। कंपनी ने बताया कि कम अवधि वाली किस्त योजनाओं के विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं।
इस अभियान के तहत आवासीय ग्राहकों के लिए पांच किलोवाट-घंटे से ४० किलोवाट-घंटे तक की क्षमता वाले बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, वाणिज्यिक और औद्योगिक ग्राहकों के लिए ६० किलोवाट-घंटे से लेकर पांच मेगावाट-घंटे तक की क्षमता वाले समाधान पेश किए जाएंगे। इन प्रणालियों की मदद से अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहित कर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे ऊर्जा प्रबंधन बेहतर होगा और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अभियान का एक अन्य प्रमुख हिस्सा ‘मेरा गांव, मेरा सोलर’ कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रूफटॉप सोलर के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सामुदायिक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के बारे में लोगों को जागरूक करना भी है।
टाटा पावर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर पश्चिम बंगाल में ‘घर-घर सोलर’ अभियान शुरू करके कंपनी को खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि आसान वित्तीय सुविधाओं और सरकारी सब्सिडी के माध्यम से परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उनके अनुसार, इस पहल से परिवारों को बिजली उत्पादन और उपयोग पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। साथ ही, बिजली के खर्च और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। अगले तीन वर्षों में राज्य के तीन लाख घरों तक सौर ऊर्जा का विस्तार करने का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति प्रदान करेगा।
कंपनी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक छतों पर ४,४१३ सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित की जा चुकी हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता ११७.१७ मेगावाट-पीक है। कंपनी का दावा है कि इन प्रणालियों के माध्यम से हर साल लगभग १.४० लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकने में मदद मिल रही है।
३० सितंबर २०२६ तक टाटा पावर सोलारूफ ने पूरे भारत में ५,७४,९४८ रूफटॉप सोलर प्रणालियां स्थापित की हैं। इनकी कुल स्थापित क्षमता ५.६७ गीगावाट-पीक से अधिक है।
इसके अतिरिक्त, टाटा पावर ने पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए २०८ इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग केंद्र तथा ६,३८० से अधिक घरेलू चार्जर स्थापित किए हैं। कंपनी सौर ऊर्जा, बैटरी भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

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