काेलकाता: महंगाई भत्ता (डीए) मामले में राज्य सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पी.के. मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष हुई।
अदालत ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद कर्मचारियों के वकील को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख ६ मई तय की है, यानी यह सुनवाई अब चुनाव के बाद होगी।
राज्य सरकार का पक्ष:
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों को बकाया डीए के तहत लगभग ६००० करोड़ रुपये का भुगतान किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के अनुसार यह भुगतान किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन कर्मचारियों के रिकॉर्ड उपलब्ध थे, केवल उन्हीं को भुगतान किया गया है। शेष कर्मचारियों को भुगतान समिति की अगली गाइडलाइन आने के बाद किया जाएगा।
कर्मचारियों की ओर से आपत्ति:
कर्मचारियों की ओर से पेश अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि उन्हें समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया, इसलिए अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों के बीच भेदभाव कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
पीठ ने कहा कि डीए का आंशिक भुगतान शुरू किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बकाया २५ प्रतिशत डीए का तत्काल भुगतान किया जाना था और शेष ७५ प्रतिशत का भुगतान ३१ मार्च तक किया जाना था।
राज्य सरकार ने इस समयसीमा को बढ़ाकर ३१ दिसंबर करने की मांग की है। इसी संबंध में पूर्व न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो आगे की सिफारिशें देगी। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई ६ मई को होगी।









