नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को लेकर एक कठिन कानूनी और समय की चुनौती का सामना कर रहे हैं। १९७३ के ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ के अनुसार, यदि अमेरिकी कांग्रेस सैन्य कार्रवाई के लिए मंजूरी नहीं देती है, तो राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर अपनी सेना वापस बुलानी पड़ती है। वर्तमान में यह समय-सीमा तेजी से समाप्त हो रही है और अब तक ट्रंप को कांग्रेस से अनिवार्य अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग के सूत्रों से यह जानकारी निकलकर आ रही है कि ट्रंप प्रशासन पश्चिम एशिया में अपनी अत्यंत विनाशकारी हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली ‘डार्क ईगल’ को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (सेन्टकॉम) ने इस घातक मिसाइल को ईरान के खिलाफ संभावित हमले के लिए अग्रिम मोर्चे पर रखने की मांग की है।सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के पास वर्तमान में जो हथियार मौजूद हैं, वे ईरान के गहराई में स्थित कुछ महत्वपूर्ण मिसाइल ठिकानों को नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, हालिया संघर्षों के कारण अमेरिका की ‘प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों’ की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अमेरिकी सेना के लिए नई और मारक रणनीति अपनाना अनिवार्य हो गया है। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए ‘डार्क ईगल’ जैसे हाइपरसोनिक सिस्टम को मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। यह मिसाइल प्रणाली ध्वनि की गति से पांच गुना से भी अधिक रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है, जिसके कारण इसे दुनिया के किसी भी मौजूदा डिफेंस सिस्टम से रोक पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है। यह प्रणाली दुश्मन के सबसे सुरक्षित और उच्च-मूल्य वाले ठिकानों को कुछ ही मिनटों में मलबे के ढेर में तब्दील कर सकती है।यदि अमेरिका इस मिसाइल की तैनाती की दिशा में आगे बढ़ता है, तो इससे ईरान के साथ चल रहा तनाव एक अत्यंत विनाशकारी मोड़ पर पहुंच सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ‘डार्क ईगल’ जैसी घातक तकनीक का इस्तेमाल न केवल युद्ध के दायरे को बढ़ा सकता है, बल्कि इससे पूरे मध्य पूर्व में एक लंबी जंग की शुरुआत हो सकती है क्योंकि ईरान भी चुप बैठने के बजाय जवाबी कार्रवाई में अपनी पूरी ताकत झोंक सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें वाशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हैं, जहां राष्ट्रपति ट्रंप को कानूनी समय-सीमा समाप्त होने से पहले यह तय करना है कि वे शांति का मार्ग चुनेंगे या फिर महायुद्ध के खतरे को न्योता देंगे।









