टीम में बार-बार बदलाव रणनीति नहीं, मजबूरी थी: महेला जयवर्धने

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रायपुर: आईपीएल २०२६ में मुंबई इंडियंस के चैंपियन बनने की संभावनाएं समाप्त होने के बाद टीम के मुख्य कोच महेला जयवर्धने को कठिन सवालों का सामना करना पड़ा। रविवार रात रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अंतिम गेंद पर रोमांचक जीत हासिल की, जिसके साथ ही ५ बार की चैंपियन टीम प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई। इस हार के बाद संवाददाता सम्मेलन में जयवर्धने से टीम के प्रदर्शन, लगातार बदलाव और सीनियर खिलाड़ियों को बेंच पर रखने की रणनीति जैसे मुद्दों पर सवाल किए गए।
​जयवर्धने ने पूरे सीजन को निराशाजनक बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम मिले हुए मौकों का फायदा नहीं उठा सकी। जयवर्धने ने कहा, “यह सीजन निराशाजनक रहा। हमें मौके मिले थे लेकिन हम उनका लाभ नहीं उठा पाए। गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में निरंतरता की कमी दिखी और इसी ने अंतर पैदा किया। हमें प्लेऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए २-३ जीत की जरूरत थी, लेकिन हम मैच नहीं जीत सके। आज का मैच भी उसी का उदाहरण है, जहां हम मामूली अंतर से पीछे रह गए।”
​उन्होंने आगे कहा, “अभी पूरे सीजन का आकलन करना मुश्किल है। गलती कहां हुई, इस पर मुझे सोचने की जरूरत है। हम अपने कौशल और निष्पादन में इस सीजन में अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थे और यह सच है।”
​मुंबई इंडियंस ने इस सीजन में अपने अंतिम एकादश में लगातार फेरबदल किया, जो टीम की पहचान के विपरीत है। जयवर्धने ने इन बदलावों को रणनीतिक कम और मजबूरी अधिक बताया। उन्होंने कहा, “हमें इस सीजन में खिलाड़ियों की चोट और फिटनेस समस्याओं से जूझना पड़ा। खिलाड़ियों के उपलब्ध न होने पर हम बदलाव करने के लिए मजबूर हुए। रणनीतिक रूप से हमने कम ही बदलाव किए। मैं चाहता था कि मेरे प्रमुख खिलाड़ी लगातार खेलें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।”
​खराब फॉर्म के बावजूद सीनियर खिलाड़ियों पर भरोसा करने के सवाल पर जयवर्धने ने कहा, “खिलाड़ियों की गुणवत्ता जानने के बाद आपको यह समझना होगा कि वे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर प्रयास में कमी लगती तो मैं उनसे बात करता, लेकिन उनकी प्रतिबद्धता और मेहनत असाधारण रही।” उन्होंने रोहित शर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि चोट से उबरने के बाद वे असाधारण फॉर्म में दिखे।
​उल्लेखनीय है कि नियमित कप्तान हार्दिक पांड्या के पीठ की चोट के कारण बाहर होने से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ। इसके अलावा सूर्यकुमार यादव के खराब फॉर्म ने भी टीम को नुकसान पहुँचाया, जिन्होंने ११ मैचों में केवल १९५ रन बनाए हैं।

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