कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुखिया ममता बनर्जी को एक और बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने की घोषणा की है। रॉय ने आरोप लगाया है कि पार्टी के भीतर फैले भ्रष्टाचार और संगठनात्मक कमियों पर खुलकर आवाज उठाने के बाद उन्हें लगातार अलग-थलग किया जा रहा था और पार्टी में उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी जा रही थी।
सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पिछले काफी समय से पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने हाल के दिनों में सार्वजनिक रूप से यह संकेत भी दे दिया था कि पार्टी के भीतर गंभीर असंतोष पनप रहा है और यदि समय रहते हालात में सुधार नहीं हुआ, तो राज्य में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। उनका यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर अंदरूनी कलह और टूट की अटकलें पहले से ही काफी तेज हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कई बड़े नेताओं और पदाधिकारियों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावती सुर अपनाए हैं और कुछ ने अपने पदों से इस्तीफे भी दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुखेंदु शेखर रॉय का यह इस्तीफा सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के भीतर बढ़ रहे व्यापक असंतोष का सीधा संकेत है, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी की संसदीय राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ गठबंधन में उसकी स्थिति पर गहरा असर पड़ सकता है।










