जेन जी आंदोलन के बाद बनी सरकार का “स्वर्णिम बजट” : नेपाली अर्थव्यवस्था का नया मोड़ या फिर वही पुराने वादे?

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देवेन्द्र किशोर ढुंगाना

नेपाल के राजनीतिक इतिहास में हर राजनीतिक परिवर्तन के बाद नई आशाओं और नए नारों के साथ सरकार बनने की परंपरा रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की बढ़ती असंतुष्टि, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, दलाल पूंजीवाद और सुस्त प्रशासनिक संस्कृति के खिलाफ उभरी जनचेतना ने नेपाली राजनीति पर नया दबाव बनाया है। विशेष रूप से जेन जी ( जेन जी ) पीढ़ी की जागरूकता, सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्त असंतोष और वैकल्पिक राजनीतिक सोच ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे समय में वर्तमान सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को कई लोग “स्वर्णिम बजट” के रूप में देख रहे हैं।
वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत आर्थिक वर्ष २०८३/८४ बि. सं.का बजट केवल आय-व्यय का पारंपरिक विवरण नहीं, बल्कि राज्य की कार्यशैली और चरित्र में परिवर्तन लाने वाले नीतिगत दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। बजट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल अर्थव्यवस्था, निजी क्षेत्र की भूमिका, कृषि आधुनिकीकरण, निवेश-अनुकूल वातावरण और सुशासन को प्राथमिकता दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था को पारंपरिक ढांचे से निकालकर तकनीक-आधारित और उत्पादनमुखी दिशा में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है।
नेपाल की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो यह अभी भी मुख्यतः रेमिटेंस आधारित अर्थव्यवस्था है। उत्पादन की तुलना में उपभोग अधिक है, निर्यात की अपेक्षा आयात अत्यधिक है और कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर हैं। लाखों युवा विदेश पलायन कर रहे हैं और गांव श्रमशक्ति से खाली होते जा रहे हैं। सरकार द्वारा घोषित 21 खरब रुपये से अधिक का बजट भी अंततः विदेशी ऋण, सहायता और रेमिटेंस के इर्द-गिर्द ही घूमता दिखाई देता है। ऐसे में सरकार द्वारा प्रस्तुत “आर्थिक रूपांतरण” का नारा व्यवहार में कितना सफल होगा, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।
इस बजट का सबसे चर्चित पक्ष एआई कंप्यूट सेंटर की स्थापना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देना है। काठमांडू के स्यूचाटार में देश का पहला संप्रभु एआई कंप्यूट सेंटर स्थापित करने की घोषणा साधारण बात नहीं है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा और डिजिटल नवाचार की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब नेपाल का भी इस दिशा में कदम बढ़ाना सकारात्मक संकेत है। यदि सरकार हजारों एआई प्रोसेसिंग यूनिट उपलब्ध कराकर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को सहूलियत दे सके, तो नेपाल में नई पीढ़ी के तकनीकी उद्यमों का विकास संभव है। इससे विदेश जाने वाले युवाओं के लिए देश में ही अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ेगी।
हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। नेपाल में अभी भी स्थिर विद्युत आपूर्ति, गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट, कुशल जनशक्ति और अनुसंधान संस्कृति का अभाव है। विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच समन्वय कमजोर है। ऐसे में केवल एआई सेंटर की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं होगा; इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति, पारदर्शी प्रबंधन और दक्ष मानव संसाधन विकास भी आवश्यक होगा।
बजट में निजी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बिजली व्यापार की अनुमति देने तथा घाटे में चल रहे सार्वजनिक उद्योगों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की घोषणा भी की गई है। यह कदम अर्थव्यवस्था को सरकारी नियंत्रण से निकालकर उत्पादनमुखी साझेदारी की ओर ले जाने का प्रयास प्रतीत होता है। लंबे समय से राजनीतिक भर्ती केंद्र बन चुके सार्वजनिक उपक्रमों के पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। लेकिन निजीकरण के नाम पर कुछ सीमित व्यापारी समूहों को ही लाभ मिलने का खतरा भी बना रहेगा। इसलिए पारदर्शिता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
कृषि क्षेत्र में २ करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले किसानों को वार्षिक १० प्रतिशत प्रोत्साहन देने की नीति भी सकारात्मक दिखाई देती है। नेपाल में कृषि अभी भी मुख्यतः निर्वाह आधारित है। यदि युवाओं को आधुनिक कृषि और पशुपालन की ओर आकर्षित किया जा सके, तो रोजगार और उत्पादन दोनों में वृद्धि संभव है। लेकिन वास्तविक किसानों तक सहूलियतपूर्ण ऋण नहीं पहुंच पाने की पुरानी समस्या अब भी बनी हुई है। बिचौलियों, प्रभावशाली लोगों और कागजी किसानों द्वारा लाभ लेने की प्रवृत्ति समाप्त किए बिना कृषि क्रांति का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
इस बजट में सुशासन और भ्रष्टाचार नियंत्रण को भी महत्व दिया गया है। विभिन्न कोषों के माध्यम से सुविधाएं बांटने की परंपरा समाप्त करने, सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों को मिलने वाली विशेष छूट हटाने तथा निवेश प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने जैसी घोषणाएं सकारात्मक हैं। इससे सरकारी तंत्र को कुछ हद तक अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन नेपाल की प्रशासनिक व्यवस्था अब भी राजनीतिक हस्तक्षेप, देरी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से ग्रस्त है। नीतियां अच्छी होने के बावजूद उनका कमजोर कार्यान्वयन नेपाली राज्य की पुरानी बीमारी रही है।
जेन जी पीढ़ी जिस राजनीति की अपेक्षा करती है, वह भाषणों के बजाय परिणाम देने वाली शासन व्यवस्था है। वे अवसर, पारदर्शिता, तकनीक, दक्षता और ईमानदार नेतृत्व चाहते हैं। वर्तमान बजट इन आकांक्षाओं को कुछ हद तक संबोधित करने का प्रयास करता हुआ दिखाई देता है। लेकिन जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक उपलब्धियां देखना चाहती है। यदि पांच वर्ष बाद भी युवा बेरोजगार रहें, किसान निराश हों और उद्योग बंद होते जाएं, तो यह बजट भी अतीत के लोकप्रिय भाषणों की तरह केवल एक दस्तावेज बनकर रह जाएगा।
समग्र रूप से देखा जाए तो वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत यह बजट दृष्टिकोण की दृष्टि से महत्वाकांक्षी, आधुनिक और सुधारोन्मुख दिखाई देता है। यह नेपाल की अर्थव्यवस्था को डिजिटल, उत्पादनमुखी और निवेश-अनुकूल बनाने का संकेत देता है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि सरकार अपनी घोषणाओं को व्यवहार में उतारने में सफल होती है, तो यह बजट नेपाली अर्थव्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है; अन्यथा यह भी केवल आश्वासनों का एक और दस्तावेज बनकर रह जाएगा।

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