भूजल रिचार्ज को प्राथमिकता देने का आग्रह
कोलकाता: जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के मामले में पश्चिम बंगाल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब हाल ही में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले १२ वर्षों में राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे जल संकटग्रस्त राज्यों ने जल संरक्षण, चेक डैम निर्माण, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के मामले में पश्चिम बंगाल पीछे रहा है और भविष्य की पीढ़ियों के हित में संरक्षण ढांचे तैयार करना तथा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है।
पाटिल ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने जल क्षेत्र की किसी भी परियोजना में धन की कमी नहीं आने दी है। उन्होंने बताया कि जल संकट वाले राज्यों की समस्याओं के समाधान के लिए लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत से नदी जोड़ो परियोजनाओं की परिकल्पना की गई है और इन परियोजनाओं से जल संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ग्रामीण घरों तक पेयजल पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे जल जीवन मिशन के तहत अब तक देशभर में १६ करोड़ घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है तथा चालू वित्तीय वर्ष में ही लगभग ६७ हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
दूसरी ओर राज्य की शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है और भूजल रिचार्ज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित भूजल के बिना स्मार्ट शहरों की परिकल्पना संभव नहीं है। पॉल ने बताया कि राज्य सरकार नगरपालिका ढांचे में सुधार, नमामि गंगे कार्यक्रम के क्रियान्वयन, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति और जल संरक्षण से जुड़ी तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। पाटिल ने कहा कि यदि भारत को २०४७ तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना होगा। उन्होंने उद्योगों से भी अपील की कि उपयोग के बाद निकलने वाले पानी का उपचार कर उसका पुनः उपयोग सुनिश्चित करें। कार्यक्रम में मौजूद जल शक्ति मंत्रालय के सचिव अशोक कुमार के मीना ने भी चेतावनी दी कि भविष्य में दुनिया जिस सबसे बड़े संकट का सामना करेगी, वह पानी से जुड़ा हो सकता है।








