गाड़ियों पर नंबर प्लेट का इतिहास और इसके नियम

number-plate-8

नई दिल्ली: ​वाहनों पर नंबर प्लेट लगाने की कानूनी परंपरा की शुरुआत सबसे पहले चौदह अगस्त अठारह सौ तिरानवे को फ्रांस के पेरिस शहर से हुई थी। पेरिस पुलिस ने सड़क हादसों के बाद भागने वाले गाड़ी मालिकों को पकड़ने के मकसद से यह नियम अनिवार्य किया था। इसके बाद सन अठारह सौ छियानवे में जर्मनी ने और सन अठारह सौ निन्यानवे में नीदरलैंड्स ने पूरे देश में एक समान नंबर प्लेट कानून लागू किया। अमेरिका के न्यूयॉर्क में सन उन्नीस सौ एक से कारों के लिए लाइसेंस प्लेट अनिवार्य की गई, हालांकि शुरुआत में कार मालिक खुद चमड़े या लोहे के टुकड़ों पर अपने नाम के शुरुआती अक्षर पेंट करके गाड़ियों के पीछे चिपका देते थे, जिसे बाद में सन उन्नीस सौ तीन में मैसाचुसेट्स सरकार ने आधिकारिक रूप से जारी करना शुरू किया।
​भारत के संदर्भ में सन उन्नीस सौ के आसपास बॉम्बे, बंगाल, मद्रास और पंजाब जैसे विभिन्न प्रांतों में गाड़ियों की पहचान के अलग-अलग क्षेत्रीय कानून थे। इन सभी नियमों को व्यवस्थित करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सन उन्नीस सौ चौदह में पहली बार राष्ट्रीय स्तर का ‘भारतीय मोटर वाहन अधिनियम’ लागू किया। बाद में सन उन्नीस सौ उनतालीस के नए कानून ने दो अक्षरों वाले प्रांतीय कोड और चार अंकों वाली नंबर प्लेट के नए डिजाइन की शुरुआत की। वर्तमान समय में भारत में चलने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट व्यवस्था ‘मोटर वाहन अधिनियम उन्नीस सौ अठासी’ की धारा इकतालीस के तहत काम करती है। इस व्यवस्था में नंबर प्लेट के पहले दो अक्षर राज्य के कोड को, अगले दो अंक आरटीओ ऑफिस या जिले को, बीच के अंग्रेजी अक्षर पंजीकरण सीरीज को और अंतिम चार अंक उस वाहन की विशेष पहचान संख्या को दर्शाते हैं।
​नियमों के अनुसार निजी वाहनों के लिए सफेद, कमर्शियल वाहनों के लिए पीली और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए हरी नंबर प्लेट निर्धारित की गई है। आजकल वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के धोखे को रोकने के लिए एल्युमिनियम से बनी क्रोमियम-आधारित होलोग्राम और लेजर-एनकोडेड नंबर वाली ‘हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट’ को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही, अक्सर काम के सिलसिले में एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले लोगों की सुविधा के लिए साल दो हजार इक्कीस में केंद्र सरकार ने ‘भारत सीरीज’ की शुरुआत की, जिससे दूसरे राज्य में जाने पर वाहन का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ती। कानूनी तौर पर बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के गाड़ी चलाना या नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ करना एक गंभीर अपराध है जिसके लिए सख्त आपराधिक मुकदमा चलाया जाता है।

About Author

Advertisement