कोलकाता: ग्रीष्म ऋतु की तीव्र गर्मी में खानपान में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में लहसुन के सेवन को लेकर विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। आयुर्वेद के अनुसार लहसुन एक महत्वपूर्ण औषधीय तत्व है, लेकिन इसकी तासीर गर्म होने के कारण गर्मियों में इसे सीमित मात्रा और सही तरीके से लेना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में लहसुन का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाता है और पाचन तंत्र को सक्रिय बनाए रखता है। इसमें मौजूद प्रतिऑक्सीकारक और जीवाणुरोधी गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा कम होता है। साथ ही यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, हृदय की रक्षा करने और यकृत की शुद्धि में भी सहायक माना जाता है।
हालांकि, अधिक मात्रा में लहसुन का सेवन समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। इसकी गर्म प्रकृति के कारण अधिक सेवन से अम्लता, पेट में जलन, मुंह के छाले और शरीर का तापमान बढ़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप अधिक पसीना आना, त्वचा पर चकत्ते या मुंहासे भी हो सकते हैं। विशेष रूप से पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए इसका अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है।
गर्मियों में कच्चा लहसुन खाने के बजाय इसे पकाकर खाने की सलाह दी जाती है। दाल या सब्जी में पकाने से इसकी गर्मी कुछ कम हो जाती है और यह पचाने में भी आसान हो जाता है। दिनभर में एक से दो कली से अधिक लहसुन न खाने की सलाह दी गई है। साथ ही इसे लौकी जैसी ठंडी तासीर वाली सब्जियों के साथ लेने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की भी सलाह दी गई है, जिससे शरीर संतुलित और तरोताजा बना रहे।
जिन लोगों को अम्लता, अम्ल प्रवाह या त्वचा संबंधी गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें लहसुन का सेवन सीमित रखने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की प्रतिक्रिया को समझते हुए आवश्यकता पड़ने पर लहसुन की मात्रा कम करना ही उचित कदम है।











