नई दिल्ली: कांग्रेस के राज्यसभा मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। रमेश ने आरोप लगाया है कि प्रधान ने अपने बयानों से संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को गहरी ठेस पहुंचाई है। यह नोटिस राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा गया है, जिसके बाद देश के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का बयान और विवाद की वजह
यह पूरा मामला १५ मई को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा हुआ है, जिसमें नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया से मुखातिब हुए थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को लेकर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को क्यों लागू नहीं किया, तो मंत्री ने विवादित जवाब दिया। प्रधान ने कहा था कि वह संसद की स्थायी समिति के रेड फ्लैग्स पर टिप्पणी नहीं करेंगे और सिर्फ हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (राधाकृष्णन समिति) के बारे में बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य होते हैं और वे चीजों को एक खास तरीके से लिखते हैं, इसलिए वह इस पर कुछ नहीं बोलेंगे।
मिनी संसद की अवमानना और कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री की इन टिप्पणियों को बेहद आपत्तिजनक और संसद का अपमान बताया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने राज्यसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के नियम १८७ के तहत यह नोटिस दिया है। रमेश का तर्क है कि संसदीय समितियां संसद का ही विस्तार होती हैं और उन्हें मिनी संसद कहा जाता है, ऐसे में उन पर सवाल उठाना पूरे सदन की गरिमा को कम करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने सिर्फ इसलिए स्थायी समिति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई क्योंकि उसमें विपक्ष के सदस्य शामिल हैं। रमेश ने इसे सदन की अवमानना का गंभीर मामला बताते हुए राज्यसभा सभापति से शिक्षा मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।










