नई दिल्ली: भारत सरकार के केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘प्रगति पदयात्रा’ के अंतर्गत अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह के कई महत्वपूर्ण स्थानों का विस्तृत दौरा किया है।
इस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारत सरकार द्वारा पिछले १२ वर्षों में इस क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे के विस्तार की गहन समीक्षा की। अपनी यात्रा के पहले चरण में मंत्री ने दक्षिण अंडमान जिले के स्वराज द्वीप पर स्थित समुद्री बंदरगाह टर्मिनल के निर्माणाधीन स्थल का दौरा किया और इस प्रतिष्ठित अवसंरचना परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। इस आधुनिक बंदरगाह अवसंरचना के विकास का मुख्य उद्देश्य द्वीपों के बीच समुद्री संपर्क को मजबूत करना, पर्यटन को बढ़ावा देना, व्यापार को सुगम बनाना और स्थानीय द्वीपवासियों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करना है।
अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने श्री विजय पुरम स्थित वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने बुनियादी ढांचे में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों के माध्यम से हुए उल्लेखनीय परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र के प्रति वीर सावरकर जी के अमूल्य योगदान को याद करते हुए उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह आधुनिक हवाई अड्डा टर्मिनल हवाई संपर्क बढ़ाने, पर्यटन क्षमता को मजबूत करने और द्वीपसमूह के लोगों को बेहतर तथा आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के सरकार के संकल्प को प्रदर्शित करता है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने श्री विजय पुरम के ऐतिहासिक गांधी पार्क का दौरा किया, जहाँ उन्होंने सार्वजनिक स्थल के कायाकल्प और क्षेत्र में किए गए विभिन्न सौंदर्यकरण कार्यों की समीक्षा करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस प्रकार की विकासात्मक पहल समावेशी विकास, जन कल्याण और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यात्रा के अंतिम चरण में उन्होंने श्री विजय पुरम स्थित फ्लैग प्वाइंट का भी दौरा किया और पिछले १२ वर्षों में हासिल की गई समग्र विकासात्मक प्रगति का जायजा लिया। अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह के इन विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों में देखने को मिले दूरगामी और सकारात्मक परिवर्तन यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार देश के सुदूर क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विस्तार, कनेक्टिविटी में सुधार और जन-केंद्रित विकास को प्राथमिकता देते हुए निरंतर प्रयास कर रही है।










