किसान कन्या: भारतीय सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म और इसका ऐतिहासिक सफर

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नई दिल्ली: ​८९ साल पहले बड़े पर्दे पर उतरा था गरीब किसानों का दर्द, बॉक्स ऑफिस पर भले न चली पर तकनीकी क्रांति के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ नाम।
​भारतीय सिनेमा के इतिहास में दशकों तक पर्दे पर ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों का राज रहा, लेकिन साल १९३७ में देश को अपनी पहली रंगीन फिल्म मिली, जिसका नाम था ‘किसान कन्या’। भारत ने विभाजन से पूरे १० साल पहले ही रंगीन फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था। आर्देशिर ईरानी के प्रोडक्शन और मोती बी. गिडवानी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को भारत की पहली पूरी तरह स्वदेशी यानी देश में ही तैयार की गई कलर फीचर फिल्म के तौर पर याद किया जाता है। दिग्गज फिल्ममेकर आर्देशिर ईरानी इससे पहले देश की पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ बनाकर सिनेमा जगत में एक क्रांतिकारी के तौर पर स्थापित हो चुके थे और उन्होंने ही दर्शकों को यह रंगीन तोहफा दिया था।
​अगर फिल्म की कहानी की बात करें, तो ‘किसान कन्या’ ग्रामीण भारत के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। फिल्म में जमींदारों द्वारा गरीब किसानों के शोषण और उनके हक की लड़ाई को बेहद संजीदगी से पर्दे पर उतारा गया था। आजादी से पहले के दौर की बाकी फिल्मों की तरह ही, इस फिल्म में भी समाज की कड़वी सच्चाई और आम इंसान की आर्थिक तंगहाली को गहराई से दिखाया गया था। इस ऐतिहासिक फिल्म में पद्मादेवी, जिल्लो, गुलाम मोहम्मद और निसार जैसे सितारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। हालांकि आज की पीढ़ी शायद इन नामों से वाकिफ न हो, लेकिन उनके शानदार योगदान ने मिलकर इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म की नींव रखी थी।
​तकनीकी रूप से ‘किसान कन्या’ को सिनेकलर प्रोसेस तकनीक से तैयार किया गया था, जो उस दौर में दो रंगों को मिलाकर काम करती थी। हालांकि उस समय के रंग आज के आधुनिक सिनेमा जितने चटकीले और साफ नहीं होते थे, इसके बावजूद भारतीय दर्शकों के लिए चलते-फिरते किरदारों को पर्दे पर रंग-बिरंगा देखना किसी अजूबे से कम नहीं था। भले ही ‘किसान कन्या’ बॉक्स ऑफिस पर कोई बहुत बड़ी कमर्शियल हिट साबित नहीं हो सकी, लेकिन भारतीय सिनेमा के इतिहास में इसके महत्व को कभी कम नहीं आंका जा सकता। इसी फिल्म से प्रेरणा लेकर आने वाले दशकों में मेकर्स ने नए-नए प्रयोग किए और आज करीब नौ दशक बीतने के बाद भी जब बॉलीवुड में तकनीकी क्रांति का जिक्र होता है, तो इस फिल्म का नाम सबसे पहले सम्मान से लिया जाता है।

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