उत्तर कोरिया बनाएगा १०,००० टन का डेस्ट्रॉयर, नौसेना विस्तार तेज

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नई दिल्ली: ​उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने अपने देश की नौसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए १०,००० टन क्षमता वाला नया डेस्ट्रॉयर युद्धपोत बनाने का बड़ा आदेश जारी किया है। यह घोषणा ऐसे मोड़ पर सामने आई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित उत्तर कोरिया यात्रा को लेकर कूटनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हैं। इस कदम को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में दक्षिण कोरिया और अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं। उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार ‘रोडोंग सिनमुन’ के अनुसार किम जोंग उन ने हाल ही में नौसैनिक परीक्षणों की खुद निगरानी की और देश की समुद्री सैन्य क्षमता को तेजी से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नौसेना को आदेश दिया है कि “कांग कोन” नामक ५,००० टन श्रेणी के युद्धपोत और एक नए १०,००० टन के भारी डेस्ट्रॉयर को जल्द से जल्द परिचालन में शामिल किया जाए। दक्षिण कोरिया के ‘इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन’ के विशेषज्ञ होंग मिन के अनुसार यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया ने १०,००० टन श्रेणी के डेस्ट्रॉयर का खुलकर और स्पष्ट उल्लेख किया है, जिसे प्योंगयांग की नौसैनिक महत्वाकांक्षाओं में एक बड़े रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
​विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किम जोंग उन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित दौरे से ठीक पहले अपनी इस सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक किम जोंग उन ने हाल ही में एक नई परमाणु सामग्री उत्पादन फैक्ट्री का भी गुप्त निरीक्षण किया था और देश के परमाणु हथियार भंडार को तेजी से बढ़ाने की बात दोहराई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्र, जमीन और हवा—तीनों मोर्चों पर सैन्य क्षमता को मजबूत करना देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी है। इससे पहले मई २०२५ में ५,००० टन के एक युद्धपोत के लॉन्च के दौरान उत्तर कोरिया को तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा था, जिसमें वह जहाज आंशिक रूप से पलट गया था। उस समय किम जोंग उन ने इस घटना को गंभीर “लापरवाही” करार दिया था, जिसके बाद जहाज की मरम्मत कर उसे दोबारा लॉन्च किया गया। इस ताजा नौसैनिक निरीक्षण के दौरान किम जोंग उन के साथ उनकी बेटी किम जू ए भी मौजूद थीं, जिन्हें उत्तर कोरिया के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है और उनकी मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस नए घटनाक्रम के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव और ज्यादा गहराने की आशंका है, जिस पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए हैं।

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